पूजा अथवा पूजन किसी भगवान को प्रसन्न करने हेतु हमारे द्वारा उनका अभिवादन होता है। पूजा दैनिक जीवन का शांतिपूर्ण तथा महत्वपूर्ण कार्य है। यहाँ भगवान को पुष्प आदि समर्पित किये जाते हैं जिनके लिये कई पुर…
गुरु यहां कोई नहीं है सभी गुरु के शिष्य हैं। गुरू एक है और वो है जगत गुरु शिव। जगतगुरु शिव के शिष्य होने के लिए कोई बंधन या वर्जना पूर्वोरोपित नहीं है। जगत का कोई भी व्यक्तिगत चाहे वह किसी संप्रदाय, ज…
ध्यान और कर्मकांड में अंतर होता है। ध्यान पूरी तरह से आपका अपना काम होता है, जो अपने आप में विशिष्ट होता है। लेकिन अगर हम कर्मकांड मेंं सक्रिय रूप से भागीदारी करते हैं तो सभी लोग उसमें शामिल हो सकते ह…
गुुरु पूजा व्यक्ति को पूर्ण रूप से विकल्पहीन बनाने का एक जरिया है। सभी कर्मकांड इसी तरह के हैं। आप खुद को एक प्रक्रिया में लगा दीजिए और फिर खुद को पूरी तरह से विकल्पहीन बना लीजिए। अगर आप ऐसे बन जाते ह…
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