एलेक्जेंड को सिकंदर के तोर पर भी जाना जाता था। एलेक्जेंड एक ज्ञानी आदमी की खोज में दिन -रात घूम रहा था जिसे वो अपने साथ ले जाए। कुछ लोगों के बताने पर वह एक संत की खोज में अपनी फौज के साथ एक नगर में पह…
एलेक्जेंडर ने संत को बताया कि वह उन्हें अपने साथ अपने देश लेकर जाना चाहता है। संत ने बेहद धीमे स्वर में जवाब दिया, 'तुम्हारे पास ऐसा कुछ नहीं है जो तुम मुझे दे सको। मैं जहां-जैसा हूं, खुश हूं। मुझे यह…
यह सुनकर सिकंदर गुस्से से लाल हो गया, और उसने फौरन अपनी तलवार निकालकर बाबा के गले में सटा दी। बाबा अब भी शांत थे। उन्होंने कहा, मैं तो कहीं नहीं जा रहा। अगर तुम मुझे मारना चाहते हो, तो मार दो। मगर आज…
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तुम्हारा क्या मतलब है, सिकंदर ने क्रोधित होते हुए पूछा, बाबा बोले, क्रोध मेरा गुलाम है। मैं जब तक नहीं चाहता, मुझे क्रोध नहीं आता। पर तुम क्रोध के गुलाम हो। तुमने कई योद्धाओं को पराजित किया होगा, पर क…
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