देश

झारखंड हाई कोर्ट का अहम फैसला: तलाक के लिए 'मानसिक क्रूरता' के आरोप ठोस सबूतों से साबित करने होंगे

(फोटो: IANS)

झारखंड हाई कोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद में महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है कि सिर्फ एक ही घर में अलग रहने, वैवाहिक संबंधों में दूरी या परिजनों से कथित दुर्व्यवहार जैसे आरोपों को…

(फोटो: IANS)

इस टिप्पणी के साथ, हाई कोर्ट ने रांची फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए पति द्वारा दायर तलाक की अपील को खारिज कर दिया। फैमिली कोर्ट ने भी पहले पति की तलाक की अर्जी…

(फोटो: IANS)

यह मामला एक डॉक्टर पति (डॉ. मयंक) और एक सहायक प्रोफेसर पत्नी (रीमा) से जुड़ा है। दोनों का विवाह 28 जुलाई 2011 को विशेष विवाह अधिनियम के तहत हुआ था, जिसके बाद हिंदू रीति-र…

(फोटो: IANS)

पति ने दावा किया था कि पत्नी उनके बीमार माता-पिता से दुर्व्यवहार करती थी, एक ही घर में अलग रहती थी और बातचीत नहीं करती थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2012 के बाद से दोन…

(फोटो: IANS)

अदालत ने आरोपों को क्यों अपर्याप्त माना?

(फोटो: IANS)

अदालत ने पाया कि वैवाहिक जीवन में होने वाले सामान्य मतभेद, छोटी-मोटी परेशानियां या स्वभाव का मेल न खाना अपने आप में मानसिक क्रूरता नहीं है। पति द्वारा लगाए गए आरोपों को अ…

(फोटो: IANS)

पूरी खबर News4Social पर पढ़ें

(फोटो: IANS)
पूरी खबर पढ़ें →