झारखंड के साहिबगंज जिले में एक बरगद का पेड़ है — पचकठिया का वह विशाल, सदियों पुराना बरगद, जिसकी छाल में शायद अब भी उस दिन की आहट दर्ज है। 30 जून 1855 को इसी पेड़ के नीचे…
IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस वर्ष हूल दिवस पर राजकीय स्तर पर भी बड़ा आयोजन होगा और राज्य के कोने-कोने से लोग इस ऐतिहासिक स्थल पर पहुँचेंगे। झारखंड में यह दिन महज़ एक स्…
20 हजार लोगों की सभा, और अंग्रेजों को खुली चुनौती
इतिहासकारों के अनुसार सिदो और कान्हू मुर्मू ने अपने भाइयों चांद व भैरव और बहनों फूलो व झानो के साथ मिलकर भोगनाडीह में करीब 20 हजार लोगों की विशाल सभा बुलाई थी। उसी मंच से…
क्या यह भारत का पहला संगठित स्वतंत्रता संग्राम था?
भारतीय इतिहास की मुख्यधारा में 1857 के विद्रोह को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का दर्जा दिया जाता रहा है। लेकिन जनजातीय इतिहास के शोधकर्ताओं की राय इससे अलग है — उनके मुताबिक…
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