तमिलनाडु के नागपट्टिनम ज़िले में किसानों पर दोहरी मार पड़ी है। कुरुवई की फसल पानी की कमी के कारण गंवाने के बाद अब उनकी 11,424 एकड़ में लगी सांबा धान की फसल पर भी सूखे का…
किसानों ने सरकार द्वारा 45 दिनों तक पानी छोड़ने की घोषणा के बाद मध्यम अवधि की सांबा किस्मों की सीधी बुआई शुरू की थी। लेकिन अब वे चिंता में हैं क्योंकि बुआई के करीब 20 दिन…
इस क्षेत्र में सिंचाई मुख्य रूप से हरिचंद्र नदी पर निर्भर है। एक किसान रामनाथन एम. ने बताया कि उन्होंने 16 एकड़ में धान बोया था, लेकिन पानी न मिलने से बीज सूख गए और खेत ब…
इस साल मेट्टूर बांध सामान्य तारीख 12 जून के बजाय 81 दिन की देरी से 1 सितंबर को खोला गया था। किसानों का कहना है कि फसल को तैयार करने के लिए 45 दिनों की जल आपूर्ति वैसे भी…
फसलों के इस लगातार नुकसान ने किसानों को आर्थिक रूप से तोड़ दिया है। उन्होंने बताया कि कुरुवई फसल के नुकसान के बाद सांबा की खेती के लिए उन्हें निजी साहूकारों से कर्ज लेना…
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, तिरुवरूर से लगभग 700 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिसके हरिचंद्र नदी तक पहुँचने की उम्मीद है। हालांकि, किसानों का कहना है कि यह पा…
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