करीब दो दशक के लंबे इंतज़ार के बाद, बांग्लादेशी मूल की चर्चित लेखिका तसलीमा नसरीन शनिवार को सार्वजनिक रूप से कोलकाता लौटीं। उनकी इस यात्रा को एक भावनात्मक 'घर वापसी' के रू…
तसलीमा के लिए कोलकाता सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि भाषा, साहित्य और संस्कृति का केंद्र रहा है, जिसे वे हमेशा अपनी 'सिटी ऑफ जॉय' मानती रहीं। हालांकि उनका जन्म यहां नहीं हुआ, ल…
तसलीमा नसरीन को कट्टरपंथियों की धमकियों के कारण 1994 में अपना देश बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था। इसकी वजह उनकी किताब 'लज्जा' थी, जो 1993 में प्रकाशित हुई थी। इसमें बाबरी मस्जिद…
हालांकि उन पर कभी कोई औपचारिक प्रतिबंध नहीं था, लेकिन तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी उनके लिए कोलकाता के दरवाजे बंद ही रहे। इस साल मार्च 2025 में पश्चिम बंगाल भ…
तसलीमा नसरीन की यह वापसी उनके उपन्यास 'फेरा (द रिटर्न)' की नायिका कल्याणी की कहानी की याद दिलाती है। कल्याणी भी पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से भारत आई एक हिंदू महिला…
इस यात्रा को उनके निष्कासन के एक प्रतीकात्मक अंत के रूप में देखा जा रहा है। तसलीमा ने इस मौके पर कोलकाता के दरवाजे फिर से खुलने पर आभार व्यक्त किया है, लेकिन यह देखना बाक…
पूरी खबर News4Social पर पढ़ें