निवेश और ब्रोकिंग से जुड़ी UPI पेमेंट पर लगने वाले नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर स्टॉकब्रोकरों ने जो चिंताएं जताई हैं, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) उन…
यह पूरा मामला UPI से व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) भुगतान पर लागू हुए नए MDR ढांचे से जुड़ा है, जिससे ब्रोकरेज उद्योग पर अतिरिक्त लागत का बोझ पड़ने की आशंका है। पांडे का यह ब…
इस मुद्दे पर जेरोधा (Zerodha) के सीईओ नितिन कामथ ने विस्तार से अपनी बात रखी थी। उन्होंने एक तरफ तो UPI के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए MDR लागू करने को ज़रूरी बताया, लेकिन…
कामथ ने समझाया कि कई बार ग्राहक अपने ब्रोकिंग खाते में UPI के ज़रिए पैसे तो जमा कर देते हैं, लेकिन उसके बाद कोई ट्रेड यानी खरीद-बिक्री नहीं करते। ऐसी स्थिति में ब्रोकर को…
लागत के असर को समझाने के लिए नितिन कामथ ने एक उदाहरण भी दिया। उनके मुताबिक, अगर 10,000 ग्राहक एक महीने में 2-2 लाख रुपये के 50 UPI ट्रांसफर करें और कोई ट्रेड न करें, तो न…
इसके अलावा, उन्होंने सेबी के त्रैमासिक निपटान (Quarterly Settlement) नियम का भी ज़िक्र किया, जिसके तहत ब्रोकरों को ग्राहकों के बिना इस्तेमाल वाले पैसे हर महीने या तिमाही…
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