तमिलनाडु के नीलगिरि ज़िले में चाय उत्पादक इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून की भारी कमी के कारण गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, बारि…
छोटे चाय उत्पादकों का कहना है कि जिन बागानों से पहले हर महीने प्रति एकड़ करीब 500 किलोग्राम हरी पत्तियाँ मिलती थीं, वहाँ अब मुश्किल से 200 किलोग्राम का उत्पादन हो रहा है।…
उत्पादन में भारी गिरावट के बावजूद चाय की पत्तियों की खरीद कीमतें 20 रुपये प्रति किलोग्राम से भी कम बनी हुई हैं। जानकारों के मुताबिक, चाय की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार की…
दक्षिण-पश्चिम मानसून, जो जून से अगस्त तक रहता है, ऊटी और गुडलूर के चाय बागानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस साल 'सुपर अल नीनो' के प्रभाव के कारण नीलगिरि में कुल मिलाकर ल…
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