नीलगिरि में चाय बागान सूखे की चपेट में, पैदावार आधी से भी कम होने की आशंका
तमिलनाडु के नीलगिरि ज़िले में चाय उत्पादक इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून की भारी कमी के कारण गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, बारिश न होने से बागानों की मिट्टी…
तमिलनाडु के नीलगिरि ज़िले में चाय उत्पादक इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून की भारी कमी के कारण गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, बारिश न होने से बागानों की मिट्टी में नमी खत्म हो गई है, जिससे चाय की हरी पत्तियों के उत्पादन में अभूतपूर्व गिरावट आई है। स्थिति इतनी गंभीर है कि किसानों ने इसे कई दशकों की सबसे बड़ी गिरावट बताया है।
छोटे चाय उत्पादकों का कहना है कि जिन बागानों से पहले हर महीने प्रति एकड़ करीब 500 किलोग्राम हरी पत्तियाँ मिलती थीं, वहाँ अब मुश्किल से 200 किलोग्राम का उत्पादन हो रहा है। मौजूदा सीज़न में ही पैदावार में 10 से 20 प्रतिशत तक की कमी आ चुकी है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर सूखा जारी रहा तो चाय की सालाना औसत पैदावार 50 प्रतिशत तक गिर सकती है, जो सामान्य तौर पर सात से आठ टन प्रति एकड़ होती है।
किसानों पर दोहरी मार
उत्पादन में भारी गिरावट के बावजूद चाय की पत्तियों की खरीद कीमतें 20 रुपये प्रति किलोग्राम से भी कम बनी हुई हैं। जानकारों के मुताबिक, चाय की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थितियों पर निर्भर करती हैं, इसलिए स्थानीय स्तर पर पैदावार कम होने से किसानों को बेहतर दाम नहीं मिल रहे हैं। इसके अलावा, नमी की कमी के कारण फसल की तुड़ाई का अंतराल भी बढ़ता जा रहा है, जिससे प्रोसेसिंग फैक्ट्रियों को होने वाली आपूर्ति और घट गई है और किसानों की आर्थिक मुश्किलें बढ़ गई हैं।
मानसून की बेरुखी और भविष्य की चिंता
दक्षिण-पश्चिम मानसून, जो जून से अगस्त तक रहता है, ऊटी और गुडलूर के चाय बागानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस साल 'सुपर अल नीनो' के प्रभाव के कारण नीलगिरि में कुल मिलाकर लगभग 55 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है, जो पिछले 15 सालों में सबसे बड़ी कमी है। कुछ किसानों ने स्प्रिंकलर लगाकर अपने बागानों को बचाने की कोशिश की है, लेकिन सिंचाई उपकरणों का खर्च उठाना कई छोटे उत्पादकों के लिए संभव नहीं है। अब सभी की उम्मीदें उत्तर-पूर्व मानसून पर टिकी हैं, ताकि मिट्टी में नमी लौट सके और आगे के नुकसान को रोका जा सके।
इनपुट: IANS



