पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें 107-108 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिप…
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस झटके को सहने के लिए पहले से बेहतर स्थिति में है। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, देश का विदेशी मुद्रा भंडार…
हालांकि, अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 88.6% कच्चा तेल आयात करता है, इसल…
इसका असर परिवहन, खाद्य वस्तुओं और निर्मित उत्पादों की लागत पर भी पड़ता है। पेट्रोल, डीज़ल और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से आम परिवारों का बजट बिगड़ सकता है। अगर सरकार…
तेल की बढ़ती कीमतों का असर अलग-अलग सेक्टरों पर अलग-अलग होगा। एयरलाइंस, पेंट, रसायन, लॉजिस्टिक्स और सीमेंट जैसे उद्योगों की लागत बढ़ेगी, जिससे उनके मुनाफे पर दबाव आ सकता ह…
विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर कच्चे तेल का औसत भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहता है, तो वित्त वर्ष 2026-27 में भारत का चालू खाता घाटा बढ़कर जीडीपी का 1.9 से 2.2…
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