देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) जल्द ही आ सकता है, लेकिन एक दशक की देरी और हालिया नियामकीय बदला…
यह आईपीओ लगभग 10 साल से अटका हुआ है, जिसकी मुख्य वजह 2010 से 2014 के बीच सामने आया को-लोकेशन विवाद था। इस मामले में कुछ ब्रोकर्स पर आरोप था कि वे NSE के डेटा सेंटर से दूस…
वैल्यू रिसर्च की रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि यह लंबा कानूनी मामला अब अपने अंतिम चरण में है। NSE ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के साथ 1,491 करोड़ रुपए…
ऑप्शंस ट्रेडिंग पर निर्भरता और नई चुनौतियां
पिछले एक दशक में, जब NSE लिस्ट नहीं हो सका, तब उसके कारोबार में जबरदस्त उछाल आया। एक्सचेंज की आय लगभग 9 गुना बढ़ गई, जिसका मुख्य कारण डेरिवेटिव्स, खासकर ऑप्शंस ट्रेडिंग म…
इसी को देखते हुए सेबी ने 2024 से डेरिवेटिव्स बाजार के लिए कई नए नियम लागू किए। इन बदलावों का असर वित्त वर्ष 2026 में देखने को मिला, जो इन नियमों के तहत काम करने वाला पहला…
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