केरल के बहुचर्चित मुथांगा पुलिस फायरिंग मामले में 23 साल से अधिक समय से चल रही कानूनी लड़ाई आखिरकार अपने अंजाम तक पहुंच गई है। वायनाड की एक अदालत ने शुक्रवार को इस मामले…
यह मामला 19 फरवरी, 2003 का है, जब तत्कालीन ए.के. एंटनी सरकार के कार्यकाल में पुलिस ने एक ऑपरेशन चलाया था। इसका उद्देश्य 'आदिवासी गोत्र महा सभा' (एजीएमएस) के बैनर तले मुथा…
वायनाड जिला प्रधान सत्र न्यायालय के न्यायाधीश ए. अय्यूब खान ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष हत्या की साजिश और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप साबित करने में विफल रह…
बचाव पक्ष ने लगातार यह दलील दी थी कि इस कथित हत्या का कोई चश्मदीद गवाह नहीं था। उनका तर्क था कि घटनास्थल पर मौजूद पत्रकार और अन्य लोग काफी दूर थे और पुलिस की लगातार फायरि…
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि केरल सशस्त्र पुलिस की चौथी बटालियन के कॉन्स्टेबल विनोद की हत्या दूसरे आरोपी अशोकन ने की थी। हालांकि, मुकदमे की सुनवाई के दौरान ही अ…
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