सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने हाल ही में एक त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे 'मक्का समझौता' कहा जा रहा है। कनाडा स्थित 'जियोपॉलिटिकल मॉनिटर' की एक रि…
अगस्त की शुरुआत में हुआ यह समझौता मध्य पूर्व में बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों का नतीजा माना जा रहा है। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर बार-बार होते हमलों और होर्मु…
मक्का समझौते को नाटो जैसे सुरक्षा गठबंधन के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। इसमें भी नाटो के अनुच्छेद 5 की तरह एक प्रावधान है, जिसके तहत किसी एक सदस्य देश पर सशस्त्र हमले…
रिपोर्ट के मुताबिक, इस समझौते की सबसे बड़ी कमजोरी इसके सदस्यों के आपसी रिश्ते और उनके अलग-अलग भू-राजनीतिक हित हैं। उदाहरण के लिए, सऊदी अरब ने पिछले एक दशक में भारत के साथ…
रिपोर्ट में अतीत की एक घटना का भी जिक्र किया गया है। जब सऊदी अरब ने यमन युद्ध के लिए पाकिस्तान से सैनिक, जहाज और विमान मांगे थे, तब पाकिस्तान की संसद ने इसमें शामिल न होन…
नाटो की सफलता का एक बड़ा कारण यह है कि वह साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों के सम्मान पर आधारित है, जो इसे एक मजबूत वैचारिक आधार देता है। इसके विपरीत, मक्का समझौते…
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