भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था (Space Economy) अगले एक दशक में नई ऊंचाइयों को छू सकती है। नीतिगत सुधारों, निजी क्षेत्र की बढ़ती दिलचस्पी और अंतरिक्ष आधारित सेवाओं की लगाता…
रिपोर्ट के मुताबिक, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अगले सात से आठ वर्षों में सरकारी एजेंसियों, उद्योग जगत, स्टार्टअप्स, निवेशकों और शैक्षणिक संस्थानों को मिलकर ठोस प्रयास…
इस रिपोर्ट में देश के स्पेस सेक्टर को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए छह प्रमुख प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान की गई है। इनमें घरेलू विनिर्माण और लॉन्च क्षमता को मजबूत करने, नियाम…
अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को तीन मुख्य हिस्सों में बांटा गया है। 'अपस्ट्रीम' गतिविधियों में सैटेलाइट निर्माण, लॉन्च व्हीकल और प्रोपल्शन सिस्टम शामिल हैं। 'मिडस्ट्रीम' सेगमेंट…
CII की राष्ट्रीय समिति (अंतरिक्ष) के चेयरमैन मल्लावरपु अप्पाराव ने कहा कि भारत का स्पेस सेक्टर अब वैज्ञानिक खोज से आगे बढ़कर सैटेलाइट आधारित सेवाओं से चलने वाली एक नवाचार…
रिपोर्ट के अनुसार, डाउनस्ट्रीम एप्लीकेशन कृषि, लॉजिस्टिक्स, आपदा प्रबंधन और शासन-व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में अहम भूमिका निभा रहे हैं। ये भारत की रक्षा क्षमताओं को भी मजबू…
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