भारत में इलेक्ट्रिक कारों (EV) की मांग में ज़बरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों का रज…
बाज़ार के जानकारों का मानना है कि इस तेज़ बढ़ोतरी के पीछे एक बड़ी वजह पेट्रोल और डीज़ल की बढ़ती कीमतें हैं। पश्चिम एशिया संकट के दौरान ईंधन की कीमतों में आए उछाल ने ग्राह…
इस तिमाही में इलेक्ट्रिक कार बाज़ार में टाटा मोटर्स का दबदबा कायम रहा। कंपनी ने 32,283 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत किए, जो पिछले साल के 15,794 यूनिट की तुलना में 104% की शानद…
हालांकि, हुंडई मोटर इंडिया के लिए यह तिमाही अच्छी नहीं रही। कंपनी के इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों का रजिस्ट्रेशन 2,142 यूनिट से घटकर 1,386 यूनिट रह गया।
ईवी की मांग ऐसे समय में बढ़ी है जब कई पारंपरिक वाहन बनाने वाली कंपनियाँ अपनी गाड़ियों के दाम बढ़ा रही हैं। उत्पादन लागत, कच्चे माल की कीमतों और परिचालन खर्च में वृद्धि का…
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद इलेक्ट्रिक वाहनों की रनिंग कॉस्ट स्थिर बनी रही, जिसने बड़ी संख्या में खरीदारों को आकर्षित किया।…
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