भारत जैसे-जैसे हरित ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की दिशा में अपने कदम बढ़ा रहा है, देश में कुछ बेहद ज़रूरी खनिजों की मांग में भारी उछाल आने की संभावना है। समाचार एजेंस…
रिपोर्ट का अनुमान है कि देश के बढ़ते इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम के कारण लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, ग्रेफाइट, तांबा और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (Rare Earth Elements) जैसे खनिज…
सिर्फ़ उपलब्धता नहीं, आत्मनिर्भरता पर ज़ोर
रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि भारत को केवल इन खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके बजाय, देश को खनन, रिफाइनिंग, प्रोसेसिंग, रीस…
पहला चरण (2026-31): इस दौरान बुनियादी ढांचा तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसमें एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (EPR), सर्कुलर मिनरल प्रोसेसिंग ज़ोन और…
दूसरा चरण (2031-36): इस अवधि में रीसाइक्लिंग प्रणालियों का विस्तार करने, ग्रीन फाइनेंसिंग को बढ़ावा देने और औद्योगिकीकरण को गति देने का लक्ष्य रखा गया है।
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