कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया भर में सप्लाई चेन को लेकर जो बदलाव शुरू हुए हैं, उनका सबसे बड़ा फायदा भारत को मिलता दिख रहा है। उद्योग संगठन एसोचैम की एक ताजा रिपोर्ट के म…
इस बदलाव के पीछे 'चीन+1', फ्रेंडशोरिंग और नियरशोरिंग जैसी रणनीतियां हैं, जिनका मकसद सप्लाई चेन को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है। एसोचैम ने दुनिया की 10 सबसे बड़ी व…
आंकड़े इस बदलाव की कहानी साफ तौर पर दिखाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, महामारी से पहले (2016-19) भारत की औसत विनिर्माण वृद्धि दर 3.44% थी, जो 2022-25 के दौरान बढ़कर 4.15% हो…
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा, "वैश्विक विनिर्माण व्यवस्था में धीरे-धीरे लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव हो रहा है। अब कंपनियां सिर्फ उत्पादन की लागत नहीं, बल्कि सप्ला…
सरकारी योजनाएं जैसे- प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई), औद्योगिक कॉरिडोर और पीएम गति शक्ति
रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि यदि भारत लॉजिस्टिक्स, कारोबार करने में आसानी (Ease of Doing Business) और घरेलू सप्लायर नेटवर्क को और बेहतर बनाता है, तो वह वैश्विक…
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