गुजरात में अब बिजली ट्रांसमिशन लाइनों और टावरों के लिए अधिग्रहित की जाने वाली कृषि भूमि का मुआवज़ा सरकारी 'जंत्री' दर के बजाय ज़मीन की मौजूदा बाज़ार कीमत के आधार पर दिया जाए…
यह निर्णय मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में किसान संगठनों के साथ हुई कई दौर की चर्चा के बाद लिया गया है। किसान लंबे समय से मुआवज़ा निर्धारण के लिए ज़्यादा व्यावहारिक…
नई नीति के तहत मुआवज़े के भुगतान की प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। पहले जहाँ किसानों को किस्तों में भुगतान किया जाता था, वहीं अब पूरी 100 प्रतिशत राशि एकमुश्त दी जाएगी।…
इसके अलावा, बिजली ट्रांसमिशन टावर से प्रभावित भूमि की गणना का तरीका भी बदला गया है। पुरानी नीति में सिर्फ टावर की नींव के वास्तविक क्षेत्रफल पर ही मुआवज़ा मिलता था। अब, टा…
ज़मीन के बाज़ार मूल्य का पारदर्शी और निष्पक्ष निर्धारण सुनिश्चित करने के लिए एक मार्केट रेट कमेटी (MRC) का गठन किया जाएगा। सरकार के मुताबिक, इस समिति में प्रभावित किसानों औ…
नई नीति में ट्रांसमिशन लाइन के राइट ऑफ वे (ROW) कॉरिडोर के लिए भी मुआवज़े का प्रावधान है। MRC द्वारा तय बाज़ार मूल्य के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों में 30%, नगरपालिका क्षेत्र…
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