मार्च 1959 की वो रात, जब तिब्बत के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा को अपनी पहचान छिपाकर एक आम सैनिक का वेश धारण करना पड़ा था। चीनी सेना के बढ़ते दबाव और एक सशर्त निमंत्रण के बा…
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह घटनाक्रम 10 मार्च 1959 को एक चीनी जनरल झांग चेनवू के निमंत्रण से शुरू हुआ। जनरल ने दलाई लामा को एक कार्यक्रम में आमंत्रित किया, लेकिन साथ…
लोगों के विरोध के एक हफ़्ते बाद, 17 मार्च 1959 को नेचुंग ओरेकल (तिब्बती देववाणी) से परामर्श के बाद दलाई लामा को तत्काल तिब्बत छोड़ने का स्पष्ट निर्देश मिला। उसी रात करीब…
उस समय अरुणाचल प्रदेश को 'नेफा' के नाम से जाना जाता था। उन्हें पहले अरुणाचल के तवांग और फिर असम लाया गया। भारत पहुँचने के कुछ हफ़्तों बाद उनकी मुलाक़ात तत्कालीन प्रधानमंत…
6 जुलाई 1935 को तिब्बत के एक छोटे से गाँव तक्तसेर में जन्मे तेनजिन ग्यात्सो को महज़ दो साल की उम्र में 13वें दलाई लामा के पुनर्जन्म के रूप में मान्यता दी गई थी। 'दलाई लाम…
तिब्बत के बिगड़ते हालात को लेकर उन्होंने 1954 में माओ त्से-तुंग जैसे चीनी नेताओं से बीजिंग में और 1956 में भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नेहरू से भी चर्चा की थी, लेकि…
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