देश में रेल के जरिए माल ढुलाई को आसान और किफायती बनाने के लिए भारतीय रेल ने एक बड़ा कदम उठाया है. अब कंटेनर ट्रेन चलाने वाली निजी कंपनियों (ऑपरेटरों) को अलग-अलग रूट के लि…
इस नई व्यवस्था का मकसद लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाना और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देना है. इससे न केवल ऑपरेटरों के लिए कारोबार करना आसान होगा, बल्कि लॉजिस्टि…
रेल मंत्रालय द्वारा स्वीकृत इन संशोधनों के बाद, पहले से चली आ रही रूट-आधारित श्रेणी व्यवस्था खत्म हो जाएगी. पहले ऑपरेटरों को अलग-अलग रूट श्रेणियों के लिए अलग-अलग अनुमति औ…
लाइसेंस की अवधि खत्म होने के बाद इसे 20 वर्षों के लिए बढ़ाया भी जा सकेगा. यह विस्तार ऑपरेटर के संतोषजनक प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा और इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं…
जो कंपनियां पहले से अलग-अलग श्रेणियों में काम कर रही हैं, उनके लिए भी प्रावधान किए गए हैं:
कैटेगरी-फर्स्ट: इस श्रेणी के लाइसेंसधारी अपनी मौजूदा रियायत अवधि समाप्त होने तक काम जारी रख सकते हैं. नई व्यवस्था के तहत लाइसेंस का नवीनीकरण कराते समय उनसे कोई शुल्क नहीं…
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