छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में कभी नक्सली कमांडर रहे सीताराम सोनवानी अब अपने परिवार के साथ एक सामान्य और सुरक्षित जीवन जी रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, साल…
सीताराम ने बताया कि वह 1998 में नक्सली संगठन में शामिल हुए थे और 2005 तक उत्तर सरगुजा क्षेत्र में कमांडर बन गए थे। उनकी ज़िंदगी में बदलाव तब आया जब उनकी पत्नी बिराजो ने उ…
कुछ समय बाहर रहने के बाद सीताराम को सरकार की नक्सल पुनर्वास नीति की जानकारी मिली। उन्हें लगा कि आत्मसमर्पण करने से न केवल वे पूरी तरह से मुख्यधारा में लौट पाएंगे, बल्कि स…
आत्मसमर्पण के बाद उन्हें करीब 14 महीने जेल में रहना पड़ा। इस दौरान वे दो मामलों में बरी हुए और तीन में उन्हें जमानत मिली। जेल से बाहर आने के बाद उन्हें पुनर्वास योजना के…
सीताराम की पत्नी बिराजो ने बताया कि उन्होंने ही पति को नक्सलवाद का रास्ता छोड़ने के लिए समझाया था, जिसके बाद परिवार को करीब 16 साल तक बाहर रहना पड़ा। अब सरकारी मदद से पक्…
बलरामपुर जिला पंचायत के सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी के मुताबिक, प्रशासन मुख्यधारा में लौटे लोगों और नक्सल हिंसा प्रभावित परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए विशेष प…
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