सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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नक्सलवाद छोड़ मुख्यधारा में लौटे पूर्व कमांडर की बदली ज़िंदगी, सरकारी योजना से मिला पक्का घर

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में कभी नक्सली कमांडर रहे सीताराम सोनवानी अब अपने परिवार के साथ एक सामान्य और सुरक्षित जीवन जी रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2021 में आत्मसमर्पण करने के…

नक्सलवाद छोड़ मुख्यधारा में लौटे पूर्व कमांडर की बदली ज़िंदगी, सरकारी योजना से मिला पक्का घर
(फोटो: IANS)

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में कभी नक्सली कमांडर रहे सीताराम सोनवानी अब अपने परिवार के साथ एक सामान्य और सुरक्षित जीवन जी रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2021 में आत्मसमर्पण करने के बाद उन्हें सरकार की पुनर्वास नीति के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है और अब उनका अपना पक्का मकान है। सीताराम के लिए हिंसा और जंगल के रास्ते से निकलकर घर-परिवार और बच्चों के भविष्य पर ध्यान केंद्रित करने का यह एक नया अध्याय है।

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सीताराम ने बताया कि वह 1998 में नक्सली संगठन में शामिल हुए थे और 2005 तक उत्तर सरगुजा क्षेत्र में कमांडर बन गए थे। उनकी ज़िंदगी में बदलाव तब आया जब उनकी पत्नी बिराजो ने उन्हें नक्सली गतिविधियां छोड़कर आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया। सीताराम के अनुसार, पत्नी ने समझाया कि उनके नाम से लोग डरते हैं और उन्हें यह रास्ता छोड़ देना चाहिए। इसके बाद उन्होंने संगठन छोड़ने का फैसला किया और परिवार के साथ असम चले गए।

आत्मसमर्पण और पुनर्वास का सफ़र

कुछ समय बाहर रहने के बाद सीताराम को सरकार की नक्सल पुनर्वास नीति की जानकारी मिली। उन्हें लगा कि आत्मसमर्पण करने से न केवल वे पूरी तरह से मुख्यधारा में लौट पाएंगे, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ भी उठा सकेंगे। इसी सोच के साथ उन्होंने 26 फरवरी 2021 को बलरामपुर में रामकृष्ण साहू के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।

आत्मसमर्पण के बाद उन्हें करीब 14 महीने जेल में रहना पड़ा। इस दौरान वे दो मामलों में बरी हुए और तीन में उन्हें जमानत मिली। जेल से बाहर आने के बाद उन्हें पुनर्वास योजना के तहत लाभ मिलने शुरू हुए, जिसमें पक्का मकान भी शामिल है। सीताराम ने इस मदद के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और बलरामपुर के पूर्व एसपी लाल उमेद सिंह का आभार जताया है।

परिवार को मिला सहारा

सीताराम की पत्नी बिराजो ने बताया कि उन्होंने ही पति को नक्सलवाद का रास्ता छोड़ने के लिए समझाया था, जिसके बाद परिवार को करीब 16 साल तक बाहर रहना पड़ा। अब सरकारी मदद से पक्का घर मिल गया है और पूरा परिवार यहीं रह रहा है। उन्होंने बच्चों की पढ़ाई में मदद और खुद 10वीं की पढ़ाई पूरी करने में मिले सहयोग के लिए भी सरकार और पूर्व एसपी को धन्यवाद दिया।

बलरामपुर जिला पंचायत के सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी के मुताबिक, प्रशासन मुख्यधारा में लौटे लोगों और नक्सल हिंसा प्रभावित परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए विशेष पहल कर रहा है। जिले में कुल 27 मकान स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 18 बनकर तैयार हैं।

अब ज़मीन के पट्टे का इंतज़ार

पक्का घर मिलने के बाद अब सीताराम को वन भूमि का पट्टा मिलने की उम्मीद है, जिस पर उनका परिवार रहता है। उन्होंने बताया कि ज़मीन से जुड़े दस्तावेज़ जमा कर दिए गए हैं और उन्हें भरोसा है कि सरकार जल्द ही पट्टा उपलब्ध कराएगी। सीताराम ने सरकार से यह प्रक्रिया जल्द पूरी करने का आग्रह किया है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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