दरअसल, दुनिया में मौजूद हर शख्स क़ामयाब होने की दिली
ख्वाहिश रखता है, लेकिन वही शख्स कुछ कर गुज़रता है जिसमें कुछ करने का हौसला,
ज़िद व सोच होती है। रशिया के क्रासनोयार्क्स में रहने वाले 20 साल के छात्र इवान कुजिन ने भी
दरअसल, पासपोर्ट बनवाने से पहले कुजिन अपने सिग्नेचर/साइन/हस्ताक्षर बदलना
चाहते थे। इसी सिलसिले में वह अपनी दोस्त
अनास्तासिया डोर के पास पहुंचे। अनास्तासिया ने चीन से कैलिग्राफी सीखी है।
पूरी खबर News4Social पर पढ़ें