देश में एक ऐसा मामला सामने आया है जिस पर पश्चताप के अलावा और कुछ भी नहीं किया जा सकता. एक बेगुनाह ने अपनी ज़िन्दगी के 14 साल जेल में गुज़ार दिए लेकिन जब रिहाई के आदेश आये तब तक वह इस दुनिया से जा चूके थ…
हम सबने सुना है की भले ही सौ दोषी छूट जाएं लेकिन एक बेगुनाह को सजा नहीं मिलनी चाहिए. बिमलेंदु मोंडाल के मामले में यह महज एक विचार ही बनकर रह गया. उन्होंने अपनी जिंदगी के 14 साल जेल में गुजारे. पत्नी क…
कोलकाता हाई कोर्ट ने 14 साल पुरानी अपील पर सुनवाई तय की और फैसला आया की वह अपनी पत्त्नी की हत्या के मामले में अपराधी नहीं है. उससे पहले 2004 में पीड़ित बिमल को लोअर कोर्ट ने अपराधी मानते हुए उम्र केद क…
उस वक्त बिमल ने बांकुरा कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए कोलकाता हाई कोर्ट में अपील दायर की थी. इस केस की कभी सुनवाई नहीं हो सकी क्योंकि वह गरीब शख्स खुद को निर्दोष साबित करने के लिए एक वकील कर पाने…
जज के आग्रह पर फिर से शुरू हुई थी मामले की सुनवाई
13 साल बाद हाई कोर्ट के जज के आग्रह के बाद केस को फिरसे खोला गया. जज ने एक वकील से यह आग्रह किया कि वह बिना फीस के इस केस को स्वीकार करें. लोअर कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ सुनवाई शुरू हुई लेकिन…
पूरी खबर News4Social पर पढ़ें