शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
देश

राष्ट्रपति मुर्मु का राष्ट्र के नाम संदेश: विभाजन की विभीषिका से लेकर समावेशी विकास तक, देश की उपलब्धियों को किया याद

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए देश की यात्रा को याद किया — विभाजन की भयावहता से लेकर पिछले एक दशक में हासिल किए गए समावेशी विकास तक…

राष्ट्रपति मुर्मु का राष्ट्र के नाम संदेश: विभाजन की विभीषिका से लेकर समावेशी विकास तक, देश की उपलब्धियों को किया याद
(फोटो: IANS)

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए देश की यात्रा को याद किया — विभाजन की भयावहता से लेकर पिछले एक दशक में हासिल किए गए समावेशी विकास तक। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अपने संबोधन में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को नमन किया और राष्ट्र निर्माण में हर नागरिक के योगदान की सराहना की।

विज्ञापन

राष्ट्रपति ने 14 अगस्त को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के रूप में याद करते हुए कहा कि सांप्रदायिक हिंसा के कारण लाखों लोगों को शरणार्थी बनना पड़ा और बंटवारे की त्रासदी झेलनी पड़ी। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद, लोगों ने अपनी पहचान नहीं छोड़ी। इसी संदर्भ में, उन्होंने सरदार पटेल के योगदान को भी रेखांकित किया, जिन्होंने 550 से अधिक रियासतों का नवस्वाधीन भारत में विलय कर एक असाधारण चुनौती को पूरा किया।

राष्ट्र निर्माण में जनभागीदारी

राष्ट्रपति मुर्मु ने इस बात पर जोर दिया कि देश के विकास में हर वर्ग का योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “निष्ठावान विद्यार्थी और शिक्षक, विकास के लिए तत्पर वैज्ञानिक और इंजीनियर, स्वास्थ्य सेवा में कार्यरत डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी, मेहनती श्रमिक और अन्नदाता किसान अपने प्रयासों से राष्ट्र-निर्माण कर रहे हैं।” उन्होंने संविधान के मूल कर्तव्यों का पालन करने वाले सभी नागरिकों को राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भागीदार बताया।

राष्ट्रपति ने कहा कि आज साधारण पृष्ठभूमि के लोग भी असाधारण योगदान दे रहे हैं, जो इस विश्वास को मजबूत करता है कि आज के भारत में हर व्यक्ति बड़े सपने देख सकता है और उन्हें पूरा भी कर सकता है। उन्होंने वेद-वाक्य का उल्लेख करते हुए कहा, “वयं राष्ट्रे जागृयाम”, जो हमें राष्ट्र के लिए सदैव जागरूक रहने की प्रेरणा देता है।

विरासत, विकास और सामाजिक न्याय

संबोधन में राष्ट्रपति ने महात्मा गांधी और बाबासाहब भीमराव आंबेडकर जैसे महान नेताओं को नमन किया, जिनके आदर्शों पर चलते हुए देश स्वतंत्र हुआ। उन्होंने कहा कि भारत अपनी समृद्ध विरासत को अपनाते हुए आधुनिक विकास के मार्ग पर अग्रसर है।

पिछले एक दशक से अधिक समय में हुए विकास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश ने तेज गति से समावेशी विकास किया है और दशकों पुराने अनेक अवरोधों को दूर किया है। सामाजिक न्याय के क्षेत्र में महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले के योगदान को याद करते हुए राष्ट्रपति ने बताया कि विगत कुछ वर्षों में वंचित वर्गों को आगे बढ़ाना राष्ट्रीय प्राथमिकता रही है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से मुक्ति मिली है, प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत लगभग 59 करोड़ लोग बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े हैं और 80 करोड़ लोगों को निशुल्क राशन की व्यवस्था से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हुई है।

इनपुट: IANS

N

News4Social नेशनल डेस्क

News4Social नेशनल डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से राष्ट्रीय घटनाक्रम से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →