गहरे समुद्र में मछली पकड़ने का नया दौर: राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू, मछुआरों को मिलेंगे अधिकार पत्र
भारत ने अपने विशाल समुद्री संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। गुरुवार को भुवनेश्वर में आयोजित एक कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने गहरे समुद्र (हाई सीज) में
भारत ने अपने विशाल समुद्री संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। गुरुवार को भुवनेश्वर में आयोजित एक कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने गहरे समुद्र (हाई सीज) में मछली पकड़ने के लिए अधिकार पत्र (Letter of Authorization) जारी करने की राष्ट्रीय पहल का शुभारंभ किया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस मौके पर ओडिशा के लिए विशेष 'डीप सी फिशिंग मिशन' दस्तावेज़ भी लॉन्च किया गया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय मछुआरों को देश के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone) और गहरे समुद्र के संसाधनों का सतत और जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से उपयोग करने में सक्षम बनाना है। अब तक मछली पकड़ने की गतिविधियाँ मुख्य रूप से तटीय क्षेत्रों तक ही सीमित थीं, लेकिन इस नई पहल से मछुआरे समुद्र में टूना जैसी उच्च मूल्य वाली मछलियों का भी दोहन कर सकेंगे।
आर्थिक संभावनाएँ और रोज़गार
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि यह कार्यक्रम केंद्र, राज्य सरकार और मछुआरा समुदाय के साझा प्रयासों का नतीजा है, जो इस क्षेत्र में विकास, स्थिरता और समृद्धि का एक नया युग लाएगा। उन्होंने बताया कि भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है, जिसकी वैश्विक उत्पादन में लगभग 8 प्रतिशत हिस्सेदारी है। पिछले वित्त वर्ष में देश का समुद्री खाद्य निर्यात 73,000 करोड़ रुपये से अधिक रहा, और इस नई पहल से इसमें और वृद्धि की उम्मीद है।
यह क्षेत्र देश के करीब तीन करोड़ मछुआरों और मत्स्य पालकों की आजीविका का आधार है। माना जा रहा है कि इस कार्यक्रम से मछली पकड़ने, प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, परिवहन, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और निर्यात सेवाओं में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
सतत विकास और तकनीक पर ज़ोर
सीपी राधाकृष्णन ने जोर देकर कहा कि आर्थिक विकास के साथ-साथ समुद्री संसाधनों का संरक्षण भी एक नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “सतत मत्स्य पालन केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है।” इसके लिए उन्होंने डिजिटल ऑथराइजेशन सिस्टम, जहाजों की ट्रैकिंग, अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन और अवैध मछली पकड़ने पर सख्त नियंत्रण की आवश्यकता पर बल दिया।
इस नई व्यवस्था में मत्स्य सहकारी समितियों, फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (FPO) और भारतीय मछुआरों को प्राथमिकता के आधार पर अधिकार पत्र दिए जाएंगे, जिसे तटीय समुदायों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कार्यक्रम में देशभर के 10 फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन और मछुआरों को अधिकार पत्र सौंपे भी गए।
युवाओं से अपील और 'विकसित भारत' का लक्ष्य
उपराष्ट्रपति ने युवाओं से अपील की कि वे मत्स्य पालन को पारंपरिक पेशे के बजाय विज्ञान, तकनीक, नवाचार और वैश्विक अवसरों से जुड़ा एक आधुनिक व्यवसाय समझें। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों से मछुआरा समुदाय को ज्ञान, तकनीक और वित्तीय सहायता प्रदान करने का आह्वान किया, ताकि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार किया जा सके।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह और धर्मेंद्र प्रधान सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
इनपुट: IANS



