संस्कृति
होलिका की कितनी परिक्रमा और किस तरह से करनी चाहिए दाएं से या बाएं से
होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। होलिका की परिक्रमा तीन, पांच या सात बार बाएं से दाएं की जाती है, जिसमें सूत के धागे का उपयोग किया जाता है।
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होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। होलिका की परिक्रमा तीन, पांच या सात बार बाएं से दाएं की जाती है, जिसमें सूत के धागे का उपयोग किया जाता है।
होली सिर्फ एक त्योहार या परंपरा ही नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण से लेकर आपकी सेहत के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।
होली का त्यौहार ऐसा त्यौहार है ,जिसका हर कोई इंतजार करता है, होली के त्यौहार को हम सब पुराने मनमुटाव को भूलाकर आपस में एक-दूसरे को रंग लगाकर उल्लास के साथ…
पिछले 100 सालों में होली कई बार फरवरी में मनाई गई है। 1945, 1964 और 1972 में होलिका दहन और होली दोनों फरवरी के महीने में आए थे।