आर्ट ऑफ लिविंग: 10 साल पुरानी कानूनी लड़ाई खत्म, सुप्रीम कोर्ट ने 5 करोड़ का जुर्माना किया रद्द
करीब एक दशक चली कानूनी लड़ाई के बाद आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने 2016 में दिल्ली में यमुना किनारे हुए 'विश्व…
करीब एक दशक चली कानूनी लड़ाई के बाद आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने 2016 में दिल्ली में यमुना किनारे हुए 'विश्व संस्कृति महोत्सव' के आयोजन से पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने के मामले में संस्था पर लगाए गए 5 करोड़ रुपये के जुर्माने को रद्द कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को यह राशि वापस लौटाने का भी निर्देश दिया है।
यह पूरा मामला 2016 में यमुना के बाढ़ क्षेत्र में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम से जुड़ा है, जिसके बाद संस्था पर पर्यावरण को भारी क्षति पहुँचाने के आरोप लगे थे। इसी आधार पर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने मार्च 2016 में आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन पर 5 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया था। संस्था ने यह राशि जमा भी कर दी थी, लेकिन मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
कोर्ट का फैसला और DDA की भूमिका
मंगलवार को दिए अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस बात का कोई सीधा सबूत नहीं है कि आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रम से यमुना के संवेदनशील क्षेत्र को नुकसान पहुँचा था। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इस क्षेत्र की रक्षा करने की अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहा।
श्री श्री रविशंकर द्वारा स्थापित आर्ट ऑफ लिविंग संगठन के एक पंजीकृत सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट, व्यक्ति विकास केंद्र ने यह जुर्माना भरा था। अब कोर्ट के आदेश के बाद DDA को यह 5 करोड़ रुपये की राशि ट्रस्ट को लौटानी होगी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि DDA, एनजीटी के निर्देशों के अनुसार यमुना के बाढ़ क्षेत्र के मैदान के पुनर्वास (rehabilitation) का काम जारी रखेगा।
इनपुट: IANS



