ईरान-अमेरिका तनाव से तेल में उबाल, भारतीय शेयर बाजार लगातार छठे दिन गिरावट पर
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला, जहाँ लगातार छठे कारोबारी दिन बिकवाली का दबाव…
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला, जहाँ लगातार छठे कारोबारी दिन बिकवाली का दबाव हावी रहा। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड के 91 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँचने और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के चलते प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में खुले।
मंगलवार को कारोबार की शुरुआत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 309.19 अंक (0.39%) गिरकर 77,418.97 पर खुला। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 सूचकांक 0.26% की गिरावट के साथ 24,223.85 पर खुला।
बाजार में दिनभर का हाल
खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 263.98 अंकों (0.34%) की गिरावट के साथ 77,464.18 पर कारोबार कर रहा था। दिन के दौरान इसने 77,575.21 का उच्चतम और 77,362.19 का निचला स्तर छुआ। वहीं, निफ्टी 50 भी 42.40 अंक (0.17%) फिसलकर 24,245.25 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। इसका दिन का हाई 24,269.65 और लो 24,211.10 रहा।
अगर व्यापक बाजार (broader market) की बात करें तो निफ्टी मिडकैप में 0.08% की गिरावट देखी गई, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स 0.27% की बढ़त दर्ज करने में कामयाब रहा।
आईटी शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव
सेक्टर के हिसाब से देखें तो सबसे ज्यादा बिकवाली आईटी शेयरों में हुई, जहाँ निफ्टी आईटी इंडेक्स 1% से ज्यादा टूट गया। इसके अलावा फाइनेंशियल सर्विसेज, प्राइवेट बैंक, मीडिया, मेटल, एफएमसीजी और रियल्टी जैसे सेक्टरों में भी गिरावट का रुख रहा। हालांकि, इस कमजोरी के बीच कुछ सेक्टरों में खरीदारी भी दिखी। निफ्टी ऑटो इंडेक्स में करीब 0.40% और पीएसयू बैंक इंडेक्स में 0.29% की तेजी दर्ज की गई।
गिरावट के पीछे के बड़े कारण
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएँ बढ़ा दी हैं। इसी वजह से ब्रेंट क्रूड 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर और अमेरिकी WTI क्रूड 85.37 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया है। इसके साथ ही, अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड का बढ़कर 4.73% पर पहुँचना भी इक्विटी बाजारों के लिए एक नकारात्मक संकेत है, क्योंकि यह विदेशी निवेशकों के लिए उभरते बाजारों में निवेश को कम आकर्षक बनाता है।
विश्लेषकों के अनुसार, भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की ऊँची कीमतें महंगाई, चालू खाते के घाटे और कंपनियों की लागत पर असर डाल सकती हैं। हालांकि, उनका यह भी मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और घरेलू निवेशकों की खरीदारी बाजार को बड़ा सहारा दे सकती है।
इनपुट: IANS



