झारखंड: मतदाता सूची पुनरीक्षण में धीमी गति, 26 दिन में 22 लाख से ज्यादा मामले निपटाने की चुनौती
झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम अंतिम चरण में है, लेकिन इसकी समय-सीमा पूरी होने से पहले लगभग 23 लाख मामलों का निपटारा एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। समाचार एजेंसी IANS से…
झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम अंतिम चरण में है, लेकिन इसकी समय-सीमा पूरी होने से पहले लगभग 23 लाख मामलों का निपटारा एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। समाचार एजेंसी IANS से मिले 4 नवंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न श्रेणियों के कुल 59.53 लाख मामलों में से अब तक केवल 36.69 लाख का ही निष्पादन हो पाया है, जबकि प्रक्रिया पूरी होने में सिर्फ 26 दिन बाकी हैं।
राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, कुल 22.84 लाख मामले अब भी लंबित हैं। इनमें 'नो मैपिंग' श्रेणी के 7.95 लाख और 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' के 14.88 लाख मामले शामिल हैं। इन श्रेणियों में मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच और सत्यापन का काम किया जाता है।
किस श्रेणी में कितनी प्रगति?
नो मैपिंग: इस श्रेणी में उन मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच होती है, जिनका नाम या उनके परिवार के किसी सदस्य का नाम 2003 की मतदाता सूची से नहीं जुड़ पाया है। राज्य में ऐसे कुल 14,04,033 मामले थे, जिनमें से अब तक 6,08,618 (43.35 प्रतिशत) का ही निपटारा हुआ है। इसका मतलब है कि आधे से ज़्यादा, यानी 7,95,415 मामले अभी भी लंबित हैं।
लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी: इस श्रेणी में पुरानी और नई मतदाता सूची के विवरण में तार्किक विसंगतियों, जैसे माता-पिता और बच्चों की उम्र में असामान्य अंतर या पारिवारिक संबंधों की गलत जानकारी, की जांच की जाती है। इसमें स्थिति थोड़ी बेहतर है। कुल 45,49,961 मामलों में से 30,61,159 (67.28 प्रतिशत) का निष्पादन हो चुका है, लेकिन 14,88,802 मामले अब भी बाकी हैं।
जिलों का प्रदर्शन: कहीं तेज़ी, कहीं सुस्ती
जिलावार आंकड़ों में काफी असमानता देखने को मिलती है। 'नो मैपिंग' के मामलों में पश्चिमी सिंहभूम 96.16 प्रतिशत निष्पादन के साथ सबसे आगे है, जबकि गिरिडीह (19.52%), साहिबगंज (21.03%) और पलामू (25.25%) जैसे जिले काफी पीछे हैं। राजधानी रांची में भी सिर्फ 29.03% काम ही पूरा हुआ है।
इसी तरह, 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' श्रेणी में भी पश्चिमी सिंहभूम (99.72%) और लोहरदगा (99.08%) शीर्ष पर हैं। वहीं, पाकुड़ (45.88%), साहिबगंज (48.57%) और पलामू (49.55%) का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा है।
'अदर कैटेगरी' के मामलों में राज्य ने समग्र रूप से 97.91 प्रतिशत की अच्छी प्रगति की है। इस स्थिति को देखते हुए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों को काम में तेजी लाने का निर्देश दिया है। उन्होंने जिला निर्वाचन पदाधिकारियों से नियमित समीक्षा करने और विशेष कार्ययोजना बनाकर सत्यापन का काम समय पर पूरा करने को कहा है।
इनपुट: IANS



