अमित शाह का ममता सरकार पर बड़ा आरोप, कहा — घुसपैठ रोकने के लिए BSF को ज़मीन नहीं दी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार पर सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सिलीगुड़ी में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि जब तक राज्य में…
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार पर सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सिलीगुड़ी में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि जब तक राज्य में घुसपैठ पर रोक नहीं लगती, तब तक पश्चिम बंगाल और भारत पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो सकते। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, शाह ने इस बात पर जोर दिया कि देश की सुरक्षा के लिए मजबूत सीमा प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।
शाह ने बताया कि उन्होंने खुद एक बार तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यालय जाकर उन्हें समझाया था कि सीमा सुरक्षा बल (BSF) के लिए ज़मीन की मांग की जा रही है, न कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए। उन्होंने कहा, "इसके बाद भी तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जमीन नहीं दी, जिसकी वजह से हम काम नहीं कर पा रहे थे।"
नई सरकार बनते ही 45 दिन में मिली ज़मीन
केंद्रीय गृह मंत्री ने सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवानों को संबोधित करते हुए राज्य में नई सरकार बनने के बाद आए बदलाव का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में सरकार बनने के 45 दिनों के भीतर ही सुवेंदु अधिकारी ने BSF और SSB को 1,129 एकड़ ज़मीन उपलब्ध करा दी। अमित शाह के अनुसार, "यह तेज़ी इसलिए नहीं है कि सरकार भाजपा की है बल्कि इसलिए है क्योंकि सीमा सुरक्षा को लेकर गंभीरता है।"
BSF के लिए नई परियोजनाओं का शिलान्यास
इस दौरे के दौरान अमित शाह सिलीगुड़ी में BSF के फ्रंटियर हेडक्वार्टर की प्रशासनिक इमारत की आधारशिला रखने वाले हैं। इसके अलावा, जलपाईगुड़ी में BSF की 12वीं और 19वीं बटालियन के लिए आवासीय और गैर-आवासीय परियोजनाओं के साथ एक ट्रांजिट कैंप का भी ई-शिलान्यास किया जाना है, जिसकी तैयारियां चल रही हैं।
स्वतंत्रता दिवस और 'वंदे मातरम' का उल्लेख
अपने संबोधन में अमित शाह ने हाल ही में मनाए गए स्वतंत्रता दिवस का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस बार लाल किले से 'वंदे मातरम' का पूरा गायन देश और दुनिया ने सुना, जो उनके लिए एक विशेष अनुभव था। उन्होंने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की इस रचना को स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा बताते हुए कहा कि आजादी के बाद भी इस गीत को पूरे रूप में स्वीकार नहीं किया गया, जिसका उन्हें लंबे समय से दुख रहा है।
इनपुट: IANS



