चीन का शनचो-23 मिशन: अंतरिक्ष यात्रियों ने साढ़े पांच घंटे की स्पेसवॉक सफलतापूर्वक पूरी की
चीन के थ्यानकोंग अंतरिक्ष स्टेशन पर तैनात शनचो-23 मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों ने अपनी पहली स्पेसवॉक सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस स्पेसवॉक के दौरान स्टेशन के बाहर कई…
चीन के थ्यानकोंग अंतरिक्ष स्टेशन पर तैनात शनचो-23 मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों ने अपनी पहली स्पेसवॉक सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस स्पेसवॉक के दौरान स्टेशन के बाहर कई महत्वपूर्ण कार्यों को अंजाम दिया गया, जिसमें अंतरिक्ष यात्री चू यांगचू और चांग चीयुआन ने हिस्सा लिया।
शुक्रवार को हुई यह स्पेसवॉक करीब साढ़े पांच घंटे तक चली। पेइचिंग समय के अनुसार, दोपहर 1 बजकर 59 मिनट पर दोनों अंतरिक्ष यात्री, चू यांगचू और चांग चीयुआन, सुरक्षित रूप से थ्यानहे कोर मॉड्यूल में वापस लौट आए। इस मिशन के तीसरे सदस्य ली च्यायिंग ने भी समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
स्पेसवॉक के दौरान पूरे किए गए कार्य
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष स्टेशन की कार्यक्षमता को बनाए रखना और बढ़ाना था। अंतरिक्ष यात्रियों ने स्टेशन के रोबोटिक आर्म और ज़मीन पर मौजूद वैज्ञानिकों की मदद से सौर पैनलों की बाहरी मरम्मत की। इसके अलावा, उन्होंने अंतरिक्ष मलबे से बचाव के लिए नए उपकरण भी स्थापित किए। यह चीनी अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा सौर पैनलों की दूसरी बाहरी मरम्मत थी, जिससे स्टेशन की बिजली आपूर्ति की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित हुई है।
इस स्पेसवॉक की एक खास बात यह भी थी कि अंतरिक्ष यात्री चू यांगचू ने तीन साल बाद एक बार फिर अंतरिक्ष में चहलकदमी की, जबकि चांग चीयुआन के लिए यह उनका पहला स्पेसवॉक अनुभव था।
मिशन की अब तक की प्रगति
शनचो-23 के तीनों अंतरिक्ष यात्री, चू यांगचू, चांग चीयुआन और ली च्यायिंग, इस साल 24 मई को अंतरिक्ष के लिए रवाना हुए थे और 25 मई को उन्होंने थ्यानकोंग अंतरिक्ष स्टेशन में प्रवेश किया था। चीन के मानवयुक्त अंतरिक्ष इंजीनियरिंग कार्यालय के मुताबिक, तब से लेकर अब तक यह दल कई तरह के अभ्यास पूरे कर चुका है, जिसमें पेलोड तैनाती, डॉकिंग अभ्यास और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के अभ्यास शामिल हैं। वे अंतरिक्ष जीवन विज्ञान, मानव शरीर पर शोध और सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण भौतिकी से जुड़े प्रयोगों पर भी लगातार काम कर रहे हैं। तीनों अंतरिक्ष यात्री अब तीन महीने से अधिक समय से कक्षा में हैं और आगे भी अपनी योजना के अनुसार वैज्ञानिक कार्य जारी रखेंगे।
इनपुट: IANS



