यूपी राज्यसभा चुनाव: सपा ने अनुभवी रामगोपाल यादव और उद्योगपति धनराज नाथवानी पर लगाया दांव
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने अपनी रणनीति साफ कर दी है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, पार्टी ने बुधवार को दो उम्मीदवारों के नामों की घोषणा…
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने अपनी रणनीति साफ कर दी है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, पार्टी ने बुधवार को दो उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की, जिसमें एक तरफ पार्टी के वरिष्ठ संसदीय नेता प्रोफेसर रामगोपाल यादव हैं, तो दूसरी ओर उद्योग जगत और खेल प्रशासन से जुड़े धनराज परिमल नाथवानी को मैदान में उतारा गया है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में दोनों ही प्रत्याशियों ने लखनऊ स्थित विधानसभा परिसर में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और विधायक भी मौजूद रहे। पार्टी ने अपने आधिकारिक 'एक्स' हैंडल के जरिए इन दोनों नामों का ऐलान किया।
कौन हैं धनराज नाथवानी?
धनराज नाथवानी का नाम सामने आने के साथ ही राज्यसभा चुनाव की सियासत में एक नया मोड़ आ गया है। वे रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड में ग्रुप प्रेसिडेंट के पद पर कार्यरत हैं और 2010 से समूह के साथ विभिन्न भूमिकाओं में जुड़े रहे हैं। उनकी प्रोफाइल के अनुसार, वे रिलायंस न्यू एनर्जी लिमिटेड के निदेशक भी हैं। उनके पिता, परिमल नाथवानी, भी रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े रहे हैं और राज्यसभा सदस्य हैं।
उद्योग के अलावा, नाथवानी खेल प्रशासन में भी एक जाना-पहचाना नाम हैं। वह वर्तमान में गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (GCA) के अध्यक्ष हैं और पहले उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण परियोजना में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके अतिरिक्त, वह गुजरात स्टेट फुटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष और द्वारका देवस्थान समिति के उपाध्यक्ष के तौर पर भी सेवाएं दे चुके हैं।
चुनाव का गणित और सपा की चुनौती
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है और उसी दिन वोटों की गिनती की जाएगी। निर्वाचन आयोग के अनुसार, नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर है। विधानसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए, एक उम्मीदवार को जीत के लिए 37 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता होगी।
समाजवादी पार्टी के पास दो उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या बल मौजूद है, लेकिन असली चुनौती तीसरी सीट को लेकर है। यदि पार्टी तीसरा उम्मीदवार खड़ा करती है, तो उसे अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी, जिससे प्रथम वरीयता के साथ-साथ दूसरी और तीसरी वरीयता के वोटों का महत्व बढ़ जाएगा। भाजपा और उसके सहयोगियों के पास आठ सीटें जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल माना जा रहा है। सपा के तीसरे उम्मीदवार उतारने की स्थिति में मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।
इनपुट: IANS



