अक्टूबर से बदल रहे हैं UPI, LPG सब्सिडी और टैक्स से जुड़े कई नियम, जानें आपकी जेब पर क्या होगा असर
अक्टूबर महीने की शुरुआत के साथ ही आपकी वित्तीय दुनिया में कई महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहे हैं। ये बदलाव यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) से लेकर रसोई गैस (LPG) सब्सिडी, टैक्स फाइलिंग और बैंकिंग सेवाओं…
अक्टूबर महीने की शुरुआत के साथ ही आपकी वित्तीय दुनिया में कई महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहे हैं। ये बदलाव यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) से लेकर रसोई गैस (LPG) सब्सिडी, टैक्स फाइलिंग और बैंकिंग सेवाओं तक फैले हुए हैं, जिनका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन नए नियमों को 1 अक्टूबर से लागू किया जा रहा है।
UPI और डिजिटल भुगतान
सबसे बड़े बदलावों में से एक UPI से जुड़ा है। 1 अक्टूबर से, ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर एक नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फ्रेमवर्क लागू होगा। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि इसका बोझ ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। साथ ही, लोगों के बीच होने वाले यानी व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) UPI लेनदेन पहले की तरह पूरी तरह से मुफ्त बने रहेंगे।
टैक्स और TDS से जुड़े बदलाव
करदाताओं के लिए भी कुछ अहम बदलाव हैं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए टैक्स ऑडिट के दायरे में आने वाले करदाताओं को बड़ी राहत दी है। टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की आखिरी तारीख 30 सितंबर से बढ़ाकर 21 अक्टूबर कर दी गई है। इसी के साथ, आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि भी 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 21 नवंबर कर दी गई है। इसके अलावा, 1 अक्टूबर से अनिवासी विक्रेताओं से संपत्ति खरीदने वाले निवासी व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) को TDS के लिए अलग से TAN लेने की जरूरत नहीं होगी; वे अपने पैन कार्ड का उपयोग कर सकेंगे।
LPG सब्सिडी और बैंकिंग नियम
घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए 1 अक्टूबर से सब्सिडी वाला सिलेंडर बुक करने के लिए आधार बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। जो लोग इस प्रक्रिया को पूरा नहीं करेंगे, उन्हें सब्सिडी का लाभ नहीं मिल पाएगा। वहीं, बैंकिंग क्षेत्र में, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपने सैलरी पैकेज खाताधारकों के लिए नियमों में बदलाव किया है। अब वे दूसरे बैंकों के एटीएम से महीने में केवल पांच मुफ्त लेनदेन कर पाएंगे, जबकि पहले यह सीमा 10 थी। यह नियम वित्तीय और गैर-वित्तीय, दोनों तरह के ट्रांजैक्शन पर लागू होगा। हालांकि, बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट (BSBD) खातों के लिए महीने में चार मुफ्त नकद निकासी की सुविधा जारी रहेगी, जिसके बाद हर निकासी पर ₹15 और जीएसटी देना होगा।
अन्य वित्तीय परिवर्तन
इनके अलावा, नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में प्वाइंट ऑफ प्रेजेंस (POP) के लिए संशोधित शुल्क ढांचा भी लागू होगा, जिसमें हर PRAN के लिए ₹200 का एकमुश्त ऑनबोर्डिंग शुल्क शामिल है। साथ ही, आरबीआई के निर्देशानुसार, अब क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को कारोबारी दिनों में सुबह 10 बजे तक अपनी वेबसाइट पर बल्क डिपॉजिट पर लागू ब्याज दरों की जानकारी प्रकाशित करनी होगी।
इनपुट: IANS



