राजस्थान में सूखे का संकट: अशोक गहलोत ने सरकार पर लगाया अनदेखी का आरोप, हजारों गायों की मौत का दावा
राजस्थान के कई इलाके गंभीर सूखे और चारे की किल्लत से जूझ रहे हैं, जिसके चलते हजारों मवेशियों की मौत की खबर है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने राज्य सरकार पर इस संकट…
राजस्थान के कई इलाके गंभीर सूखे और चारे की किल्लत से जूझ रहे हैं, जिसके चलते हजारों मवेशियों की मौत की खबर है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने राज्य सरकार पर इस संकट की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार से तत्काल मदद मांगने की अपील की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, गहलोत ने बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर जैसे जिलों में स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया है।
अपने हाल के बीकानेर दौरे का जिक्र करते हुए गहलोत ने कहा, "अगर हमने समय रहते कदम नहीं उठाए और मुख्यमंत्री स्तर पर निगरानी सुनिश्चित नहीं की, तो पूरे राज्य के लोगों को भुगतना पड़ेगा।" उन्होंने दावा किया कि जैसलमेर के एक पूर्व विधायक ने उन्हें बताया है कि वहां हजारों गायें मर चुकी हैं। गहलोत के मुताबिक, सरकार स्थिति का जायजा तो ले रही है, लेकिन चारे का कोई इंतजाम नहीं किया जा रहा, जिसकी कीमत 20 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
पानी की कमी और राहत कार्यों की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री ने इस साल कम बारिश के कारण राजस्थान और उत्तर भारत में गहराते जल संकट पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश के बांध भी पूरी तरह नहीं भर पाए हैं, जिससे पीने के पानी की भारी किल्लत हो गई है। अपनी सरकार के कार्यकाल को याद करते हुए गहलोत ने कहा, "एक बार ऐसी स्थिति आई थी, जब हमने 16 अगस्त से ही राहत कार्य शुरू कर दिया था... मैं समझता हूं कि उनके लिए यह मुश्किल हो सकता है, लेकिन यह तो डबल इंजन की सरकार है, फिर वे केंद्र से बात क्यों नहीं करते?" उन्होंने बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में वह केंद्र से 'काम के बदले अनाज' योजना लेकर आए थे और संकट का बेहतर प्रबंधन किया था।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के बयान पर माफी की मांग
अशोक गहलोत ने स्थानीय निकाय चुनावों में अनियमितताओं और पुलिस द्वारा धमकाने का भी आरोप लगाया। साथ ही, उन्होंने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ से उनके एक बयान के लिए बिना शर्त माफी मांगने की मांग की। गहलोत ने कहा, "मदन राठौड़ को बिना किसी 'अगर-मगर' के ईमानदारी से और स्पष्ट रूप से खेद जताना चाहिए।" उन्होंने कहा कि राठौड़ जितनी सफाई देने की कोशिश कर रहे हैं, उतना ही मामला बिगड़ रहा है, क्योंकि पाकिस्तान का जिक्र आते ही जनता में गहरा आक्रोश पैदा हो जाता है।
इनपुट: IANS



