पंजाब: फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों से करोड़ों का रियल एस्टेट घोटाला, ED ने अजय सहगल के ख़िलाफ़ दायर की चार्जशीट
पंजाब के एक बड़े रियल एस्टेट घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मुख्य आरोपी अजय सहगल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह कार्रवाई 'सनटेक सिटी' नामक एक…
पंजाब के एक बड़े रियल एस्टेट घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मुख्य आरोपी अजय सहगल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह कार्रवाई 'सनटेक सिटी' नामक एक प्रोजेक्ट से जुड़ी है, जिसमें फ़र्ज़ी सहमति पत्रों के ज़रिए कृषि भूमि को आवासीय और व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए बदलवाने का आरोप है। ईडी ने 20 जुलाई 2026 को मोहाली की विशेष पीएमएलए अदालत में अजय सहगल के खिलाफ अभियोग शिकायत (चार्जशीट) दायर की।
ईडी की जांच का आधार पंजाब पुलिस द्वारा अजय सहगल और अन्य के खिलाफ दर्ज की गई FIR थी। जांच में सामने आया कि सहगल ने इंडियन को-ऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी लिमिटेड के सचिव के तौर पर 108.58 एकड़ कृषि भूमि का भू-उपयोग बदलवाने (CLU) के लिए नगर एवं ग्रामीण योजना विभाग को जाली सहमति पत्र सौंपे थे।
अनियमितताओं की लंबी फेहरिस्त
जांच में पता चला कि इसी फ़र्ज़ी CLU के आधार पर ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) ने 'सनटेक सिटी' के विकास का लाइसेंस जारी कर दिया। इतना ही नहीं, आरोपियों ने इसी आधार पर प्रोजेक्ट का RERA पंजीकरण भी हासिल कर लिया। ईडी के मुताबिक, आरोपियों ने लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करते हुए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आरक्षित ज़मीन भी GMADA को हस्तांतरित नहीं की।
यह भी पाया गया कि RERA पंजीकरण मिलने से पहले ही प्रोजेक्ट में यूनिट्स की बिक्री शुरू कर दी गई थी और GMADA से पूर्णता प्रमाण पत्र लिए बिना ही ज़मीन मालिकों को कब्ज़ा दिया जा रहा था। बिल्डिंग प्लान को भी अवैध रूप से मंजूरी दी गई, जिसमें नियमों के तहत ज़रूरी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र शामिल नहीं था।
कैसे हुआ पूरा घोटाला?
एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन को-ऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी और वीआरएस टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड (अब ABS टाउनशिप्स प्राइवेट लिमिटेड) के बीच एक संयुक्त विकास समझौता हुआ था। इसके तहत प्रोजेक्ट के विकास और बिक्री के सारे अधिकार ABS टाउनशिप को दे दिए गए, जिसके निदेशक अजय सहगल के भाई संजय सहगल और अनिल सहगल थे।
इसके बाद, ABS टाउनशिप ने 'ला कैनेला फेज 1' और 'जिला 7' को RERA में पंजीकृत कराकर यूनिट्स बेचीं। कंपनी पर 'ला कैनेला फेज 2' में बिना RERA अनुमोदन के आवासीय इकाइयां बेचने का भी आरोप है। जांच में खुलासा हुआ कि GMADA को 2020 से ही फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों की शिकायतें मिल रही थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे आरोपियों को अवैध प्रोजेक्ट से कमाई करने का मौका मिलता रहा।
ईडी की कार्रवाई और बरामदगी
प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में मई और जून 2026 में कई ठिकानों पर तलाशी ली थी, जिसमें आपत्तिजनक दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण और 30.98 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी ज़ब्त की गई थी। ईडी ने अजय सहगल को इस घोटाले का मुख्य सूत्रधार मानते हुए 22 मई 2026 को गिरफ्तार कर लिया था। ईडी ने इस मामले में अपराध से हुई कुल कमाई लगभग 348 करोड़ रुपये आंकी है, जिसमें 212.58 करोड़ रुपये की बिक्री और 135.41 करोड़ रुपये की बिना बिकी संपत्ति शामिल है। मामले में आगे की जांच जारी है।
इनपुट: IANS



