पत्रकार छत्रपति हत्याकांड: राम रहीम को बरी करने के खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट में मंजूर, नोटिस जारी
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम से जुड़े पत्रकार राम चंद्र छत्रपति हत्याकांड मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा राम रहीम को बरी किए जाने के फैसले…
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम से जुड़े पत्रकार राम चंद्र छत्रपति हत्याकांड मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा राम रहीम को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ दायर एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, शीर्ष अदालत ने इस मामले में गुरमीत राम रहीम सिंह और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस भी जारी किया है।
यह याचिका मृतक पत्रकार के बेटे अंशुल छत्रपति ने दायर की थी। अंशुल ने IANS से बातचीत में बताया, “10 अगस्त को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की पीठ ने मामले को सुना और मेरी अपील स्वीकार कर ली। यह हमारे लिए राहत की बात है।” उन्होंने यह भी कहा कि राम रहीम के वकीलों ने उनकी याचिका का विरोध किया, लेकिन अदालत ने इसे दरकिनार कर दिया। मामले की अगली सुनवाई नवंबर में होगी।
क्या था हाईकोर्ट का फैसला?
इस मामले में पंचकूला की सीबीआई अदालत ने गुरमीत राम रहीम और तीन अन्य आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अंशुल छत्रपति के मुताबिक, इस फैसले के खिलाफ आरोपियों की अपील पर हाईकोर्ट ने 7 मार्च 2026 को फैसला सुनाया था, जिससे वे संतुष्ट नहीं थे। हाईकोर्ट ने गुरमीत राम रहीम को तो बरी कर दिया, लेकिन तीन सह-आरोपियों की सजा को बरकरार रखा था। इसी फैसले को अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
पृष्ठभूमि और निचली अदालत का निर्णय
पत्रकार राम चंद्र छत्रपति को अक्टूबर 2002 में सिरसा स्थित उनके घर के बाहर गोली मार दी गई थी। गंभीर रूप से घायल होने के बाद 21 नवंबर 2002 को इलाज के दौरान उनका निधन हो गया था। इस हत्याकांड में जनवरी 2019 में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने राम रहीम के अलावा कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
इनपुट: IANS



