पूर्व राज्यसभा सांसद अख्तर रिज़वी की अग्रिम ज़मानत ख़ारिज, प्रॉपर्टी धोखाधड़ी मामले में हिरासत में पूछताछ ज़रूरी: मुंबई कोर्ट
मुंबई की एक सेशन कोर्ट ने प्रॉपर्टी धोखाधड़ी और जालसाजी के एक मामले में पूर्व राज्यसभा सदस्य अख्तर हसन रिज़वी की अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज कर दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने…
मुंबई की एक सेशन कोर्ट ने प्रॉपर्टी धोखाधड़ी और जालसाजी के एक मामले में पूर्व राज्यसभा सदस्य अख्तर हसन रिज़वी की अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज कर दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए रिज़वी से हिरासत में पूछताछ करना ज़रूरी है। रिज़वी रिजवी एस्टेट एंड होटल्स के निदेशक भी हैं।
यह मामला मुंबई के बांद्रा पुलिस स्टेशन में दर्ज है, जिसमें उन पर 1978 के दस्तावेज़ों में हेरफेर कर एक संपत्ति पर कब्ज़ा करने की कोशिश का आरोप है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, संपत्ति की असल मालिक हजानी कालू का निधन 26 अप्रैल 1978 को हो गया था। आरोप है कि उनकी मृत्यु के बाद एक फर्ज़ी कन्वेयंस डीड (हस्तांतरण विलेख) तैयार कराई गई। पुलिस का यह भी आरोप है कि इस फर्ज़ी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करवाने के लिए एक महिला को हजानी कालू बनाकर पेश किया गया था।
आरोपों का खंडन और उगाही का दावा
अदालत से राहत न मिलने के बाद अख्तर हसन रिज़वी ने एक बयान जारी कर सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने दावा किया कि यह मामला इसलिए बनाया गया क्योंकि उन्होंने 2 करोड़ रुपए की उगाही की मांग पूरी करने से इनकार कर दिया था। रिज़वी ने कहा, “मेरे खिलाफ शिकायत कुछ हितों से जुड़े लोगों ने जानबूझकर दर्ज कराई है... मेरे खिलाफ लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह झूठे, बेबुनियाद और दुर्भावना से प्रेरित हैं।”
बचाव पक्ष ने तर्क दिया है कि 84 वर्षीय पूर्व सांसद का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और उन्हें झूठे मामले में फंसाया जा रहा है।
अब हाईकोर्ट का रुख करेगी कानूनी टीम
रिज़वी ने कहा कि उन्हें भारतीय न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और सच्चाई सामने आएगी। उन्होंने बताया कि उनकी कानूनी टीम अब बॉम्बे हाईकोर्ट में ज़मानत के लिए आवेदन करेगी और ज़रूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट तक जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं और न्याय की जीत को लेकर आश्वस्त हैं।
इनपुट: IANS



