मंगलवार, 11 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा, सोना-चांदी की कीमतों में आया ज़ोरदार उछाल

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर मंगलवार को भारतीय कमोडिटी बाज़ार पर साफ़ दिखाई दिया, जहाँ सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं के दाम आसमान छू गए। समाचार एजेंसी IANS की एक…

पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा, सोना-चांदी की कीमतों में आया ज़ोरदार उछाल
(फोटो: IANS)

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर मंगलवार को भारतीय कमोडिटी बाज़ार पर साफ़ दिखाई दिया, जहाँ सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं के दाम आसमान छू गए। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कारोबारी दिन की शुरुआत में ही सोने की कीमतों में 2,000 रुपये से ज़्यादा और चांदी में 5,000 रुपये से अधिक की ज़बरदस्त तेज़ी दर्ज की गई।

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यह उछाल वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में निवेशकों के सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ने का संकेत है। जब भी भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ता है, निवेशक अक्सर सोने और चांदी को एक सुरक्षित विकल्प के तौर पर देखते हैं, जिससे इनकी मांग और कीमतें बढ़ जाती हैं।

सोने और चांदी के बाज़ार का हाल

मंगलवार को अक्टूबर डिलीवरी वाले सोने का भाव अपने पिछले बंद 1,53,099 रुपये प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1.04% की बढ़त (1,600 रुपये) के साथ 1,54,699 रुपये पर खुला। दिन के कारोबार के दौरान यह और मज़बूत हुआ और 1.52% यानी 2,338 रुपये की छलांग लगाकर 1,55,437 रुपये के अपने इंट्रा-डे हाई पर पहुँच गया। हालांकि, बाद में इसमें कुछ नरमी आई और खबर लिखे जाने तक यह 0.58% (895 रुपये) की बढ़त के साथ 1,53,994 रुपये पर कारोबार कर रहा था।

इसी तरह, सितंबर डिलीवरी वाली चांदी भी तेज़ी के साथ खुली। इसका भाव पिछले बंद 2,36,867 रुपये प्रति किलोग्राम से 1.32% (3,132 रुपये) बढ़कर 2,39,999 रुपये पर खुला। दिन में इसने 2.16% की ज़बरदस्त तेज़ी के साथ 5,132 रुपये का उच्चतम स्तर भी छुआ। लेकिन, सोने की तरह इसमें भी बाद में गिरावट आई और खबर लिखे जाने तक यह 0.16% (371 रुपये) की गिरावट के साथ 2,36,496 रुपये पर ट्रेड कर रही थी।

कीमतों में तेज़ी की क्या है वजह?

कीमती धातुओं के बाज़ार को कई वैश्विक और घरेलू कारक प्रभावित कर रहे हैं। अमेरिका की उदार मौद्रिक नीति की उम्मीदें और कमज़ोर होता डॉलर सोने की मांग को और बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा, चांदी में निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी और उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताएं भी इसकी कीमतों को सहारा दे रही हैं। हालांकि, मुद्रास्फीति के आंकड़े और केंद्रीय बैंकों के संकेत बाज़ार के लिए संवेदनशील बने हुए हैं, जिससे कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है। आने वाले दिनों में इन्हीं कारकों से कीमती धातुओं के बाज़ार की दिशा तय होगी।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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