पाकिस्तान में सदियों पुराने मंदिर पर विवाद: बारिश से गिरा या मदरसे के लिए तोड़ा गया?
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक सदी से भी ज़्यादा पुराने मंदिर के तोड़े जाने की घटना ने अल्पसंख्यक समुदाय में डर और असुरक्षा की भावना बढ़ा दी है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, जहां…
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक सदी से भी ज़्यादा पुराने मंदिर के तोड़े जाने की घटना ने अल्पसंख्यक समुदाय में डर और असुरक्षा की भावना बढ़ा दी है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, जहां सरकार और इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) इसे भारी बारिश के कारण हुई प्राकृतिक घटना बता रहे हैं, वहीं अल्पसंख्यक अधिकार समूहों का आरोप है कि इसे जानबूझकर गिराया गया है।
यह घटना पिछले महीने नारोवाल में हुई, जहाँ 100 से 125 साल पुराना एक मंदिर ध्वस्त हो गया। ETPB, जो विभाजन के बाद भारत गए हिंदुओं और सिखों की संपत्तियों की देखरेख करता है, ने दावा किया कि जर्जर हो चुका मंदिर भारी बारिश के कारण ढह गया। पंजाब की प्रांतीय सरकार ने भी इसी बयान का समर्थन किया है।
अधिकार समूहों के गंभीर आरोप
हालांकि, 'पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी' (PMMP) जैसे अल्पसंख्यक अधिकार समूह इस सरकारी दावे को खारिज करते हैं। उनका आरोप है कि मंदिर को पास के एक मदरसे के लिए जगह बनाने के मकसद से जानबूझकर तोड़ा गया। PMMP के चेयरमैन असलम परवेज सहोत्रा ने बताया कि मंदिर को धीरे-धीरे तोड़ा गया और उसकी ईंटें व धातु का सामान भी हटा लिया गया। उन्होंने सवाल उठाया, "ETPB और सरकार का यह कहना कि मंदिर गिर गया, इस बात की वजह नहीं बताता कि ये सामान वहां से क्यों गायब हैं।"
सहोत्रा ने यह भी खुलासा किया कि ETPB के एक डिप्टी डायरेक्टर ने इसी साल जनवरी में मदरसे की लीज रद्द करने और अवैध कब्जा हटाने का आदेश दिया था, लेकिन उसे कभी लागू नहीं किया गया। PMMP ने अब मंदिर को उसके मूल स्वरूप में फिर से बनाने और अल्पसंख्यक पूजा स्थलों की सुरक्षा की मांग की है।
पाकिस्तान में अल्पसंख्यक धरोहरों की स्थिति
यह कोई अकेली घटना नहीं है। 'बिटर विंटर' की रिपोर्ट के मुताबिक, जून में फारूकबाद में 125 साल पुराने गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब का एक हिस्सा भी कथित तौर पर एक स्थानीय व्यापारी द्वारा बिना कानूनी मंजूरी के गिरा दिया गया था। सिख समुदाय के विरोध प्रदर्शन के बाद ही अधिकारियों ने इस मामले पर ध्यान दिया और इमारत के पुनर्निर्माण का वादा किया।
'वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी' (VOPM) के अनुसार, पाकिस्तान में हिंदू और सिखों के 98 प्रतिशत पूजा स्थल या तो वीरान पड़े हैं, उन पर ताले लगे हैं, या वे खस्ताहाल हैं। पाकिस्तान की संसदीय समिति को सौंपी गई एक रिपोर्ट के हवाले से VOPM ने बताया कि कागजों पर दर्ज 1,285 हिंदू मंदिरों और 532 गुरुद्वारों में से केवल 37 ही चालू हालत में हैं। अधिकार समूह इसे केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि संस्थागत उदासीनता और जानबूझकर की गई अनदेखी का परिणाम मानते हैं।
इनपुट: IANS



