नेपाल: विनाशकारी बाढ़ के बाद विदेश मंत्री ने चेताया — 'हिमालय में जो पिघलता है, वह समुद्र में उठता है'
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से 350 से ज़्यादा लोगों की मौत के बाद, देश के विदेश मंत्री शिशिर खनल ने हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते पारिस्थितिक खतरों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इन खतरों…
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से 350 से ज़्यादा लोगों की मौत के बाद, देश के विदेश मंत्री शिशिर खनल ने हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते पारिस्थितिक खतरों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इन खतरों का असर सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के लिए भी एक 'साझा खतरा' है।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, काठमांडू में गुरुवार को एनडीटीवी 'अन्वीक्षा' समिट को संबोधित करते हुए खनल ने कहा, “हिमालय में जो पिघलता है, वह समुद्र में उठता है।” उन्होंने भारत और नेपाल के पारंपरिक संबंधों को एक नए दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, “नेपाल और भारत ने हमेशा अपने संबंधों को रोटी-बेटी और सीता-राम के रूप में देखा है। धर्म और सभ्यतागत संबंधों ने हमारे रिश्तों में बड़ी भूमिका निभाई है। लेकिन अब हमें अपने संबंधों को पारिस्थितिकी के संदर्भ में भी नए सिरे से परिभाषित करना होगा।”
नेपाल में बाढ़ की तबाही
विदेश मंत्री ने बुधवार को नेपाल-चीन सीमा के पास हिमालयी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ का ज़िक्र किया, जिससे देश में भारी तबाही हुई है। नेपाली मीडिया आउटलेट कान्तिपुर ने नेपाल पुलिस के हवाले से बताया है कि इस त्रासदी में मरने वालों की संख्या बढ़कर 359 हो गई है। खनल ने कहा कि इस बार बाढ़ का पानी भारतीय क्षेत्रों तक नहीं पहुँचा, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं का असर भारत के सीमावर्ती इलाकों पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा, “सौभाग्य से इस बार बाढ़ भारतीय सीमा से लगे इलाकों तक नहीं पहुंची, लेकिन ऐसा पहले हो चुका है।” यह बयान ऐसे समय आया है जब नेपाल में बाढ़ के बाद भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी सतर्कता बढ़ाई गई थी।
क्षेत्रीय सहयोग की अपील
शिशिर खनल ने हिमालयी पारिस्थितिकी की रक्षा के लिए क्षेत्रीय सहयोग की तत्काल आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, “चीन, नेपाल, भारत और भूटान पारिस्थितिकी के जरिए जुड़े हुए हैं। हमारा साझा अस्तित्व और भविष्य हिमालयी पारिस्थितिकी की रक्षा पर निर्भर करता है।” उन्होंने चेतावनी दी कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद इन देशों को साथ आना होगा, क्योंकि यह क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील है। उन्होंने यह भी कहा कि बदलते हालात इस क्षेत्र में लगभग दो अरब लोगों के लिए मीठे पानी की उपलब्धता को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे भविष्य में जल संकट पैदा हो सकता है।
इनपुट: IANS



