नेपाल में भीषण बाढ़: कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए सैकड़ों भारतीय फंसे, कई लापता
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए सैकड़ों भारतीय श्रद्धालुओं को एक बड़े संकट में डाल दिया है। तिब्बत-नेपाल सीमा के पास आई इस आपदा में कई भारतीय लापता हो गए हैं, जबकि…
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए सैकड़ों भारतीय श्रद्धालुओं को एक बड़े संकट में डाल दिया है। तिब्बत-नेपाल सीमा के पास आई इस आपदा में कई भारतीय लापता हो गए हैं, जबकि सैकड़ों अन्य के फंसे होने की आशंका है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, प्रभावित लोगों में पश्चिम बंगाल की 68 वर्षीय अनीता दास और 63 वर्षीय रंजीत हलधर भी शामिल हैं, जिनसे उनके परिवारों का संपर्क टूट गया है।
भारतीय गोरखा एकता संघ का अनुमान है कि लगभग 300 से 400 भारतीय नागरिक इस आपदा में फंसे हो सकते हैं। संघ के सदस्य ध्रुव प्रधान ने इसे एक अचानक आई प्राकृतिक आपदा बताते हुए कहा, "जो लोग मुख्य घटनास्थल के आसपास थे, उन्हें अलर्ट देने का मौका नहीं मिला। जानमाल का काफी नुकसान हुआ।"
लापता श्रद्धालुओं के लिए परिवारों की गुहार
लापता लोगों के परिवार उनकी सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं और सरकार से मदद की अपील कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल की अनीता दास 21 अगस्त को अकेले ही यात्रा पर निकली थीं। उनके परिवार की सदस्य निकिता दास ने बताया, "मंगलवार को उनके बेटे की बात हुई थी और बताया था कि 3-4 घंटे का अभी रास्ता बाकी है, लेकिन 10 बजे ये घटना घट गई। हमने संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन स्विच ऑफ बता रहा है।"
इसी तरह, 63 वर्षीय रंजीत हलधर की बेटी सुनंदा ने कहा कि उनके पिता एक टूरिस्ट ग्रुप के साथ थे और बुधवार सुबह से उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा, "सरकार से यही अपील करूंगी कि जल्द से जल्द रेस्क्यू ऑपरेशन करके सबको बचाया जाए।"
छत पर फंसे 29 लोग, टूटी संपर्क की आस
भोपाल की देविका अधिकारी का दर्द भी कुछ ऐसा ही है। उनके परिवार और रिश्तेदारों समेत 29 लोग इस बाढ़ में फंसे हुए हैं। देविका के अनुसार, उनके परिवार के चार सदस्यों कृष्णा खनाल, राधिका खनाल, रामचंद्र खनाल और भवती खनाल से आखिरी बार जब बात हुई तो वे बेहद निराशाजनक स्थिति में थे।
देविका ने बताया, "बस इतनी बात हुई कि जान बचाने के लिए वो पहाड़ों पर चढ़ रहे थे। ऊपर चढ़ते समय उन्हें किसी का घर मिल गया, उस घर की छत पर वो गए और फोन किया कि हमलोग बचने वाले नहीं हैं। हम किसी की छत पर हैं, घर भी आधा डूब चुका है। अब हमारा बचना भी मुश्किल है।"
इनपुट: IANS



