म्यांमार जेल से रिहाई के बाद पूर्व अमेरिकी मरीन ने ट्रंप को बताया 'जीवनदाता', विदेश मंत्रालय पर लगाए गंभीर आरोप
म्यांमार की एक कुख्यात जेल में 97 दिन बिताने के बाद रिहा हुए एक पूर्व अमेरिकी मरीन अधिकारी ने अपनी स्वतंत्रता का श्रेय पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दिया है। एडम कैस्टिलो नामक इस पूर्व सैनिक ने…
म्यांमार की एक कुख्यात जेल में 97 दिन बिताने के बाद रिहा हुए एक पूर्व अमेरिकी मरीन अधिकारी ने अपनी स्वतंत्रता का श्रेय पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दिया है। एडम कैस्टिलो नामक इस पूर्व सैनिक ने दावा किया कि अगर ट्रंप ने हस्तक्षेप न किया होता, तो वह जीवित नहीं बचते। समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने न केवल उनकी मदद नहीं की, बल्कि रिहाई के प्रयासों में बाधा भी डाली।
कैस्टिलो को म्यांमार में गिरफ्तार कर पहले 14 दिन हिरासत में रखा गया और फिर देश की कुख्यात इनसेइन जेल भेज दिया गया, जहाँ उन्होंने अगले 83 दिन बिताए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी अपराध के लिए दोषी नहीं ठहराया गया था, बल्कि हिरासत में रखा गया था।
गिरफ्तारी की वजह और ट्रंप की भूमिका
एडम कैस्टिलो के अनुसार, उनकी गिरफ्तारी का कारण उनके पूर्व संगठन 'अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स, म्यांमार' का एक आंतरिक विवाद था। उन्होंने बताया, "संगठन का आंतरिक विवाद पुलिस तक पहुंच गया और बाद में एक अंतरराष्ट्रीय मामला बन गया। इसके बाद उन्हें रिहा कराने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप और व्हाइट हाउस को हस्तक्षेप करना पड़ा।"
अपनी रिहाई में ट्रंप के योगदान को निर्णायक बताते हुए उन्होंने कहा, "मैं अपनी जिंदगी के लिए राष्ट्रपति का ऋणी हूं।" कैस्टिलो ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, फेथ काउंसिल, पॉला व्हाइट, कार्डिनल डोलन और ग्लोबल रीच से जुड़े मिकी व कैरेन समेत कई अन्य लोगों और संगठनों का भी आभार व्यक्त किया, लेकिन कहा कि अंतिम आदेश राष्ट्रपति ट्रंप ने ही दिया था।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय पर गंभीर आरोप
जब कैस्टिलो से अमेरिकी विदेश मंत्रालय की भूमिका के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने विभाग पर कठोर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, "विदेश मंत्रालय ने उसकी मदद के लिए कुछ नहीं किया। अमेरिकी दूतावास और वहां के मिशन प्रमुख ने भी सहायता नहीं की।" उन्होंने जोर देकर कहा, "मदद करने में असफल रहने और मदद करने की इच्छा ही नहीं रखने के बीच अंतर है।" उनके मुताबिक, कई लोगों ने उनकी रिहाई के लिए विदेश मंत्रालय से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन विभाग ने उनकी कोशिशों में बाधा डाली। उन्होंने कहा, "अमेरिकी विदेश मंत्रालय को अपने रवैये पर शर्म आनी चाहिए।"
जेल के हालात और म्यांमार की स्थिति
म्यांमार की सबसे कुख्यात जेलों में से एक इनसेइन जेल के अपने अनुभव पर कैस्टिलो ने कहा कि वहां की मौजूदा परिस्थितियां पारंपरिक धारणा से अलग हैं। उन्होंने बताया कि म्यांमार की सरकारों, जेल प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति (ICRC) ने वर्षों में स्थितियों में सुधार किया है। उन्होंने कहा, "प्रत्येक सेल में शौचालय मौजूद था।" उन्होंने जेल में किसी भी तरह की मारपीट, दुर्व्यवहार या यातना देखने से इनकार किया, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि यह उनका व्यक्तिगत अनुभव है और इसे सभी कैदियों पर लागू नहीं किया जा सकता।
लगभग 13 साल तक म्यांमार में रहने वाले कैस्टिलो ने देश में सैन्य शासन और लोकतंत्र समर्थक प्रतिरोध पर भी बात की। उन्होंने कहा कि म्यांमार की जनता लंबे समय से युद्ध और आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रही है और अब यांगून जैसे शहरों में लोग सिर्फ अपने जीवन को सामान्य बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। उनके अनुसार, लोकतंत्र समर्थक सशस्त्र प्रतिरोध बहुत बिखरा हुआ है और उसे एकजुट करने वाला कोई साझा नेतृत्व नहीं है।
इनपुट: IANS



