Mundka Fire: मुंडका के आसपास इलाकों में छाया मातम, अपनों के इंतजार में बिलखते रहे परिवार वाले

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Mundka Fire: मुंडका के आसपास इलाकों में छाया मातम, अपनों के इंतजार में बिलखते रहे परिवार वाले

Mundka Fire: मुंडका के आसपास इलाकों में छाया मातम, अपनों के इंतजार में बिलखते रहे परिवार वाले

मुंडका: मुंडका अग्निकांड के बाद से ही आसपास के इलाकों में मातम का माहौल छाया हुआ है। क्योंकि यहां काम करने वाले अधिकतर लोग आसपास एरिया के ही थे। इन इलाकों में हर गली, नुक्कड़ पर लोगों का जमावड़ा लगा हुआ है और हर कोई इस अग्निकांड का ही जिक्र कर रहा है। पीड़ित परिवार से उनके रिश्तेदार, पड़ोसी और अन्य लोग मिलने पहुंच रहे हैं।

इस फैक्ट्री में प्रवेश नगर, प्रेम नगर, अगर नगर, भाग्य विहार, मुबारकपुर और मुंडका इलाके से अधिकतर महिलाएं नौकरी करती थीं। कई महिलाएं अभी लापता हैं। जिसकी तलाश में परिजन अस्पतालों से लेकर घटना स्थल तक चक्कर लगाकर थक चुके हैं। प्रवेश नगर ए ब्लॉक गली नंबर-3 से करीब 4 लोग इस फैक्ट्री में काम करते थे। इस गली में रहने वाले चमन सिंह नेगी ने बताया कि उनकी पत्नी भारती देवी (45) डेढ़ साल से फैक्ट्री में काम करती थीं। लेकिन तीन दिन के बाद भी उनका कुछ पता नहीं चल रहा है। इनके यहां पड़ोसियों और रिश्तेदारों का आना-जाना लगा हुआ है। हर कोई इनसे एक ही सवाल कर रहा है कि भारती का कुछ पता चला। चमन बताते हैं कि अब कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि पत्नी को कहां तलाश करें।

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इसी गली में रहने वाले राम भवन चौहान ने बताया कि उनकी पत्नी गीता का कुछ पता नहीं चल पा रहा है। यहां प्रोडक्शन में काम करती थीं। गीता के चार बच्चे हैं, सभी पढ़ाई करते हैं। सभी मां के गम में बेसुध हैं। गली नंबर-3 में रहने वाली मणि देवी ने बताया कि वह भी यहां काम करती थीं। घटना वाले दिन वह तीसरी मंजिल पर थीं। आग लगने के बाद क्रेन लेकर पहुंचे गांव के लोगों ने उन्हें बचाया। उनके साथ कई और महिलाएं भी काम करती थीं। जिनमें से कुछ महिलाओं का अभी कुछ पता नहीं चल पा रहा है। प्रवेश नगर के डी ब्लॉक में रहने वाली गौरी भी लापता हैं। इनके घर भी लोगों का आना-जाना लगा हुआ है।

बुजुर्ग भजन लाल और मुन्नी देवी की बेटी आशा का भी अभी तक कुछ नहीं पता चला है। बुजुर्ग दंपति ने बताया कि अस्पताल में डीएनए जांच के लिए सैंपल तो ले लिए हैं। लेकिन मॉर्चरी में पहचान के लिए नहीं जाने दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रोजाना पैसे लगाकर कैसे अस्पताल पहुंचे। हमारे पास इतने पैसे भी नहीं हैं। एक बेटी सहारा थी, उनकी कोई जानकारी नहीं दे रहा है।

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घर से बाहर बैठ करते हैं इंतजार
पीड़ित परिवार अपने-अपने घरों के बाहर बैठे मिले। उनका कहना है कि वह इस उम्मीद के साथ यहां बैठे हुए हैं कि कोई अधिकारी या फिर पुलिसकर्मी यह जानकारी लेकर आए कि उनके परिजनों की जानकारी मिल गई है। इसके साथ ही इलाके के लोगों का भी आना-जाना लगा हुआ है। रिश्तेदारों के काफी फोन आ रहे हैं, लेकिन अभी तक कहीं से कोई जानकारी नहीं मिलने से मायूस हैं।

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