मुंबई: पेड़ गिरने से हो रही मौतों के बीच BMC के पोस्टर अभियान पर उठे सवाल, नागरिकों ने बताई असल वजह
मुंबई में मानसून की बारिश के साथ पेड़ों के गिरने की घटनाओं में आई तेज़ी ने शहर की चिंता बढ़ा दी है। 1 जून से अब तक हजारों पेड़ गिरने से पांच से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और कई घायल हुए हैं। इन हा
मुंबई में मानसून की बारिश के साथ पेड़ों के गिरने की घटनाओं में आई तेज़ी ने शहर की चिंता बढ़ा दी है। 1 जून से अब तक हजारों पेड़ गिरने से पांच से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और कई घायल हुए हैं। इन हादसों के बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने एक जागरूकता अभियान शुरू किया है, लेकिन नागरिकों ने इस कदम की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, बीएमसी कमजोर और गिरने की आशंका वाले पेड़ों पर चेतावनी के पोस्टर लगा रही है। इन पोस्टरों का मकसद लोगों को ऐसे पेड़ों के पास सतर्क रहने की सलाह देना है। हालांकि, मुंबई के कई निवासियों का मानना है कि यह केवल एक अस्थायी उपाय है और समस्या की जड़ को संबोधित नहीं करता है।
नागरिकों ने कंक्रीटीकरण को बताया जिम्मेदार
शहर के लोगों का कहना है कि असली समस्या पेड़ों की कमजोर होती जड़ें हैं, जिसका मुख्य कारण बढ़ता कंक्रीटीकरण और निर्माण कार्य है। मुंबई की एक निवासी दीपा ने कहा, "यह पुरानी समझ है कि बारिश में बड़े पेड़ों के नीचे नहीं खड़ा होना चाहिए। हर पेड़ पर पोस्टर लगाना संभव नहीं है और न ही यह कोई समाधान है।"
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सड़कों और फुटपाथों के निर्माण के दौरान पेड़ों की जड़ें या तो बाहर आ जाती हैं या मिट्टी हट जाती है। दीपा ने सुझाव दिया कि पोस्टर लगाने के बजाय, बीएमसी को इन जड़ों को फिर से मिट्टी से ढककर उन्हें मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।
"पेड़ काटना समाधान नहीं"
एक अन्य महिला ने कहा कि पेड़ गिरने से हुई मौतें बेहद दुखद हैं, लेकिन इसके लिए सिर्फ पेड़ों को दोष देना ठीक नहीं। उन्होंने कहा, "सड़कों पर कंक्रीट की परतें पेड़ों की जड़ों को कमजोर कर रही हैं। हमें पेड़ों को काटने के बजाय उनकी जड़ों को मजबूत करने के उपाय खोजने चाहिए।"
उन्होंने अपनी बात समझाते हुए कहा कि जैसे किसी एक दुर्घटना के कारण लोग यात्रा करना बंद नहीं करते, वैसे ही पेड़ों को भी दुश्मन नहीं मानना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल उन टहनियों की छंटाई होनी चाहिए जिनसे खतरा हो। उनका मानना है कि पेड़ हमें ऑक्सीजन देते हैं और पर्यावरण के लिए जरूरी हैं, इसलिए उनका संरक्षण प्राथमिकता होनी चाहिए।
नागरिकों ने बीएमसी के अभियान पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल पोस्टर लगाने से जागरूकता नहीं आएगी, बल्कि खतरनाक पेड़ों की वैज्ञानिक तरीके से पहचान होनी चाहिए, ताकि समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके।
इनपुट: IANS



