मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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RSS प्रमुख मोहन भागवत ने 'पंच परिवर्तन' और स्व-बोध पर दिया जोर, OTT और नशे की लत पर जताई चिंता

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने नागपुर में आयोजित विजयादशमी उत्सव के अवसर पर नई पीढ़ी में बढ़ते नशे और विवेक के अभाव पर गहरी चिंता व्यक्त की। समाचार एजेंसी IANS की…

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने 'पंच परिवर्तन' और स्व-बोध पर दिया जोर, OTT और नशे की लत पर जताई चिंता
(फोटो: IANS)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने नागपुर में आयोजित विजयादशमी उत्सव के अवसर पर नई पीढ़ी में बढ़ते नशे और विवेक के अभाव पर गहरी चिंता व्यक्त की। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी बिना सही-गलत का विचार किए विभिन्न माध्यमों से जानकारी ग्रहण कर रही है, जिसके गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं।

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अपने संबोधन में उन्होंने विशेष रूप से 'ओटीटी प्लेटफॉर्म' पर नियंत्रण की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. भागवत ने कहा कि समाज में यह महसूस किया जा रहा है कि ओटीटी पर कुछ अनुशासन और प्रतिबंध लागू होने चाहिए, और शासन-प्रशासन को इस पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विवेक की कमी के कारण ही दुनिया भर में युवा नशीली दवाओं के आदी हो रहे हैं, जो एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या है।

पंच परिवर्तन और स्वदेशी का आह्वान

डॉ. भागवत ने 'पंच परिवर्तन' की अवधारणा पर जोर दिया, जिसमें समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, स्व-बोध व स्वदेशी और नागरिक अनुशासन शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इन पांचों पहलों का समाज के सभी वर्गों में स्वागत हुआ है और दुनिया के अन्य देशों में भी इनकी आवश्यकता महसूस की जा रही है। उन्होंने इसे केवल एक साल का कार्यक्रम न मानकर, जीवन में आचरण का स्थायी परिवर्तन लाने वाली शैली बताया।

इस संदर्भ में उन्होंने 'हिंदू मेला' के प्रवर्तक राज नारायण बसु को भी याद किया, जिनका यह 200वां जन्म वर्ष है। डॉ. भागवत ने कहा कि हमें अपनी विस्मृति को दूर कर स्व-तत्व को समझना होगा और उसके अनुरूप जीवन का निर्माण करना होगा।

विकास की संतुलित दृष्टि

सरसंघचालक ने विकास के मॉडल पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने विज्ञान और तकनीक को मनुष्य के भौतिक सुख के लिए एक महत्वपूर्ण साधन माना, लेकिन चेताया कि केवल उपभोगवादी दृष्टिकोण से होने वाला विकास बड़ी हानि पहुंचा सकता है। उन्होंने नेपाल में आई त्रासदी का उदाहरण देते हुए कहा कि यह पूरे हिमालयी क्षेत्र में चल रहे एकांगी विकास का परिणाम था। उन्होंने विकास के लिए एक समग्र और संतुलित दृष्टि की आवश्यकता पर बल दिया।

इनपुट: IANS

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