खनन कानून पर धर्मेंद्र प्रधान और नवीन पटनायक आमने-सामने, केंद्रीय मंत्री ने कहा - 'तथ्य छिपाकर गुमराह करना ठीक नहीं'
ओडिशा में खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (BJD) अध्यक्ष नवीन पटनायक द्वारा इस कानून को राज्य के हितों के लिए…
ओडिशा में खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (BJD) अध्यक्ष नवीन पटनायक द्वारा इस कानून को राज्य के हितों के लिए हानिकारक बताए जाने के बाद, पूर्व केंद्रीय मंत्री और संबलपुर से सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने उन पर पलटवार किया है। प्रधान ने पटनायक पर तथ्यों को छिपाकर और डर का माहौल बनाकर राज्य की जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है।
यह पूरा विवाद तब बढ़ा जब नवीन पटनायक ने ओडिशा के भाजपा सांसदों से इस कानून को चुनौती देने और इसे वापस लेने की मांग की। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, पटनायक ने कानून से राज्य को राजस्व का नुकसान होने की आशंका जताई थी। इसी के जवाब में धर्मेंद्र प्रधान ने पत्र लिखकर और अभियान चलाकर किए जा रहे विरोध पर सवाल उठाए हैं।
कानून से ओडिशा के हितों की रक्षा होगी: प्रधान
धर्मेंद्र प्रधान ने इस संशोधन कानून को प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का एक ऐतिहासिक फैसला बताया है। उन्होंने कहा कि यह कानून खनन क्षेत्र में अधिक पारदर्शिता और निश्चितता लाएगा, साथ ही ओडिशा जैसे खनिज-संपन्न राज्यों के आर्थिक हितों की रक्षा भी करेगा। उन्होंने तर्क दिया कि खनिजों पर अत्यधिक और बार-बार कर लगाने से लौह अयस्क, कोयला और सीमेंट जैसे जरूरी कच्चे माल की लागत बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर उद्योग, बुनियादी ढांचे और आम लोगों पर पड़ेगा।
प्रधान ने कहा, "संशोधित व्यवस्था एक अधिक पूर्वानुमानित खनन कर व्यवस्था बनाने और खनिज उत्पादक राज्यों के वैध राजस्व को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।"
राजस्व पर कोई असर नहीं पड़ेगा
राजस्व नुकसान की चिंताओं को खारिज करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि खनन से होने वाले लगभग 90 प्रतिशत टैक्स और अन्य वैधानिक भुगतान राज्यों को ही मिलते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था के तहत भी ओडिशा को नीलामी प्रीमियम, रॉयल्टी और जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) से मिलने वाले योगदान सहित अपना पूरा वैध राजस्व मिलता रहेगा।
उन्होंने बताया कि मोदी सरकार की पारदर्शी ई-नीलामी नीति और खनन सुधारों के चलते राज्य का खनन राजस्व पहले ही लगभग 5,000 करोड़ से बढ़कर 50,000 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। इसके अलावा, 2015 से अब तक ओडिशा को डीएमएफ के जरिए खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए 37,000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि मिली है।
दलीय राजनीति से ऊपर उठने की अपील
धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी याद दिलाया कि ओडिशा के सांसदों ने राज्य के व्यापक हित, औद्योगिक विकास और युवाओं के रोजगार को ध्यान में रखते हुए संसद में इस विधेयक का समर्थन किया था। उन्होंने नवीन पटनायक से आग्रह किया कि वे नेता प्रतिपक्ष के रूप में दलीय राजनीति से ऊपर उठकर तथ्यों पर विचार करें और इस ऐतिहासिक कानून का समर्थन करें। प्रधान का संदेश साफ है कि इस मुद्दे पर बहस डर और भ्रम के बजाय तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए।
इनपुट: IANS



