मिस्र के राष्ट्रपति अल-सीसी का ऐलान: 2030 के बाद पद पर बने रहने का कोई इरादा नहीं
मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने स्पष्ट किया है कि 2030 में अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद वे दोबारा राष्ट्रपति पद की दावेदारी पेश नहीं करेंगे। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के…
मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने स्पष्ट किया है कि 2030 में अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद वे दोबारा राष्ट्रपति पद की दावेदारी पेश नहीं करेंगे। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने इसे एक "पूरी तरह से तय" मामला बताते हुए इस पर किसी भी तरह की चर्चा की संभावना से इनकार कर दिया।
यह घोषणा उन्होंने मिस्र की मिलिट्री अकादमी के एक दीक्षांत समारोह के दौरान की, जो उनके प्रमुख मेगा-प्रोजेक्ट्स में से एक, 'न्यू एडमिनिस्ट्रेटिव कैपिटल' में आयोजित किया गया था। अपने संबोधन में 71 वर्षीय अल-सीसी ने कहा, "अगर मैं तब तक जीवित रहा, तो 2030 तक का समय राष्ट्रपति के रूप में मेरे कार्यकाल का अंत होगा।"
संवैधानिक संशोधन और कार्यकाल
मूल रूप से 2014 में अपनाए गए मिस्र के संविधान में राष्ट्रपति के लिए चार-चार साल के दो कार्यकाल की सीमा थी। अब्देल फतह अल-सीसी, जो एक पूर्व सेना जनरल हैं, पहली बार इसी वर्ष राष्ट्रपति बने थे। हालांकि, 2019 में एक जनमत संग्रह के माध्यम से संवैधानिक संशोधनों को मंजूरी दी गई, जिससे राष्ट्रपति का कार्यकाल चार साल से बढ़ाकर छह साल कर दिया गया। इन संशोधनों ने अल-सीसी को एक और कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ने की अनुमति भी दी, जिसके बाद वे 2023 में फिर से चुने गए। उनका यह कार्यकाल 2030 में समाप्त होगा।
आलोचना और भविष्य की योजनाएं
राष्ट्रपति अल-सीसी के इस बयान से उन अटकलों पर विराम लग गया है, जिनमें आलोचक और विपक्षी नेता आशंका जता रहे थे कि 2030 के बाद भी उन्हें पद पर बनाए रखने के लिए संविधान में और बदलाव किए जा सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, "मैंने कहा था कि मिस्र के संविधान को नहीं छुआ जाएगा। यह पूरी तरह तय मामला है और इस पर कोई चर्चा नहीं होगी।"
अल-सीसी ने यह भी बताया कि 2030 तक का समय देश में नेताओं की एक नई पीढ़ी तैयार करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मिलिट्री अकादमी में सैकड़ों भावी अधिकारियों, मंत्रियों और राष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवारों को शासन-संचालन और नेतृत्व का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
अपने 12 साल के शासनकाल में अल-सीसी ने कई बड़े विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि इन परियोजनाओं के कारण देश पर कर्ज का बोझ बढ़ा है। इसके अलावा, मानवाधिकार संगठन उनके कार्यकाल में राजनीतिक विपक्ष और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगी पाबंदियों को लेकर लगातार आलोचना करते रहे हैं, हालांकि सरकार इन आरोपों को खारिज करती है।
इनपुट: IANS



