छत्तीसगढ़: महासमुंद में 18 करोड़ का धान घोटाला, 54 खरीदी केंद्रों से स्टॉक नदारद
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में धान खरीदी व्यवस्था में एक बड़ी खामी उजागर हुई है, जहाँ सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करीब 17.93 करोड़ रुपये का धान भौतिक रूप से गायब मिला है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में धान खरीदी व्यवस्था में एक बड़ी खामी उजागर हुई है, जहाँ सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करीब 17.93 करोड़ रुपये का धान भौतिक रूप से गायब मिला है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला तब सामने आया जब जिले के 54 धान खरीदी केंद्रों पर भौतिक सत्यापन के दौरान स्टॉक शून्य पाया गया, जबकि कागजों पर हजारों क्विंटल धान मौजूद होना चाहिए था।
मामला 2025-26 धान खरीदी सत्र से जुड़ा है, जिसमें जिले के 182 केंद्रों के माध्यम से कुल 1,01,95,681.20 मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई थी। मिलिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद, इन केंद्रों पर 57,860.47 क्विंटल धान शेष बचना चाहिए था। लेकिन जब अधिकारियों ने जांच की, तो यह धान मौके पर मौजूद नहीं था। सरकार द्वारा निर्धारित 3,100 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य के आधार पर इस गायब हुए धान की कीमत 17 करोड़ 93 लाख 67 हजार 457 रुपये आंकी गई है।
प्रशासनिक निगरानी पर उठे सवाल
इस घोटाले ने पूरी निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रत्येक खरीदी केंद्र पर नोडल और मॉनिटरिंग अधिकारियों की नियुक्ति के बावजूद इतने बड़े पैमाने पर धान का गायब होना प्रशासनिक चूक को दर्शाता है। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी समय-समय पर स्टॉक का भौतिक सत्यापन सुनिश्चित करना होता है, जो इस मामले में विफल रहा।
जांच में कुछ सहकारी समितियों में भारी मात्रा में धान की कमी पाई गई। आरंगी और बम्हनी सहकारी समितियों में चार-चार हजार क्विंटल से अधिक धान गायब मिला। इनके अलावा तोषगांव, बघरपाली, मोगरापाली, और खेमड़ा समेत कई अन्य समितियों में भी लाखों रुपये के धान की कमी दर्ज की गई है।
अब तक हुई कार्रवाई
जिला विपणन अधिकारी ने पुष्टि की है कि करोड़ों रुपये का धान स्टॉक में नहीं मिला है और इस मामले की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। अब तक कुल 15 सहकारी समितियों के प्रभारियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जा चुकी है। हालांकि, कुल 54 केंद्रों पर गड़बड़ी पाई गई है, लेकिन शेष 39 केंद्रों पर क्या कार्रवाई की जाएगी, इस पर प्रशासन ने अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है।
इनपुट: IANS



