जानिए प्रसिद्ध लोनार झील का रहस्य?
भारत जितना अपने अनूठे इतिहास के लिए जाना जाता है , उतना ही भारत अपने अंदर कई रहस्य समेटे हुआ है।
भारत जितना अपने अनूठे इतिहास के लिए जाना जाता है , उतना ही भारत अपने अंदर कई रहस्य समेटे हुआ है। महाराष्ट्र के बुलढाना जिले की लोनार झील के बारे में अधिकतर लोग परिचित होंगे। क्या आप जानते है आखिर इस रहस्य्मय झील का निर्मण कैसा हुआ ? आपको बताना चाहेंगे की उल्का पिंड के पृथ्वी से टकराने के कारण यह झील बनी। लेकिन उल्का पिंड कहां गई, इसका अभी तक नहीं कोई पता नहीं चल पाया है। यहाँ तक नासा से लेकर दुनिया की तमाम एजेंसियां इस पर शोध कर चुकी हैं।

इस रहस्यमय लोनार झील के बारे में जिक्र ऋग्वेद और स्कंद पुराण में भी जिक्र किया गया है। आईन-ए-अकबरी के मुताबिक अकबर झील का पानी सूप में डालकर पीता था। हालांकि, यह खबरों में 1823 को आई जब ब्रिटिश अधिकारी जेई अलेक्जेंडर यहां पहुंचे थे। इस रहस्य्मय झील से यह कथा भी जोड़ी हुई है की लोनासुर नामक एक राक्षस था जिसका वध भगवान विष्णु द्वारा हुआ था। उसका रक्त भगवान के पांव के अंगूठे पर लग गया था जिसे हटाने के लिए भगवान विष्णु ने मिट्टी के अंदर अंगूठा रगड़ा और वह गहरे गड्ढा में तब्दील होगया।
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आपको यह भी बताना चाहेंगे की इस झील के पास कई मंदिर स्थापित है। यह भगवान विष्णु, दुर्गा, सूर्य और नरसिम्हा को समर्पित है, 10वीं शताब्दी में झील के खारे पानी के तट पर शिव मंदिर का निर्माण हुआ था जिसमें 12 शिवलिंग स्थापित किए गए थे। झील का ऊपरी व्यास करीब 7 किमी है। यह झील करीब 150 मीटर गहरी है। अब उस झील का रंग बदल गया और लोनार झील के पानी का रंग रातों-रात गुलाबी हो गया है। इसका पानी खारा है और इसका पीएच स्तर 10.5 है। विशेषज्ञ के अनुसार इस झील में रंग परिवर्तन की असली वजह जलाशय में शैवाल है।



